Saturday, September 10, 2016

हमने बचपन में साइंस की पुस्तक में पड़ा था अनुकूलन के बारे में और सोचा था की ये बहुत अच्छा गुण है और इसके सिर्फ फायदे ही फायदे हैं पर आज इस अनुकूलन का बहुत ही बड़ा दुष्प्रभाव हमारे सामने हैं ! यही अनुकूलन का गुण हमारा दुश्मन बनकर बैठ गया है ! अनुकूलन की वजह से ही हम विभिन परिस्थितियों में विभिन मौसमों में जिन्दा रह पाते हैं !
शायद इसी अनुकूलन की वजह से ही आज हम दम घोटने वाली इस राजनातिक व्यवस्था में जिन्दा हैं! मुठ्ठीभर लोग हमारे देश को लूट रहे हैं ! हमें बुद्धू बना रहे हैं , आपस में लडवा रहे हैं ! हम झंडे उठाये उनके पीछे जिंदाबाद - जिंदाबाद चिल्ला रहे हैं !

चाहिए तो ये था की लाखों कुर्बानियों से मिली आजादी को हम कम से कम इस्तेमाल तो करते तो भी हमारे शहीदों को एक श्रधांजली होती !
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने 2 साल  के करीब हो गया विकास तो हम कह नहीं सकते लेकिन परिवर्तन नजर आ रहा है आसपास के देशों में हलचल है मीडिया चाहे कोई भी हो बहुत शोर मचा रहा है जैसे कि हमें नरेंद्र मोदी से उम्मीद थी उतना नहीं तो उससे हम पर कुछ वैसा ही अंतर नजर आ रहा है

इस परिवर्तन का अंजाम क्या होगा यह तो अभी नहीं कह सकते क्योंकि ज्यादा बड़ा खतरा इस बात से है

 क्योंकि रामराज्य और रावण राज्य में कोई खास फर्क नहीं होता रावण राज्य  भी बेहद प्रतिष्ठित व सर्व साधन संपन्न था जहां पूरी लंका ही सोने की थी आसपास के देशों में उसका भय था रामराज्य में भी कुछ ऐसा ही था जनता सर्व साधन संपन्न ना भि हो परंतु उन्मुक्त स्वच्छंद वह संतुलित जीवन जीती थी राजा राजा ना होकर सेवक था छोटे से छोटे व्यक्ति की बात भी सुनी जाती थी परंतु रावण राज में ऐसा नहीं था अपने सगे भाई की बात भी नहीं सुनी जाती थी

आज के परिवेश को देखते हैं तो मोदी राज रावण राज से ज्यादा मिलता-जुलता है किसी पार्टी से कोई गिला शिकवा नहीं है दोस्तों मन में आई तो लिख दिया
हमें परिवर्तन चाहिए
लेकिन उस परिवर्तन में हम चाहते हैं कि देश के अधिकांश लोग सर्व साधन संपन्न ना भी हो लेकिन उन्हें अपने मौलिक अधिकार व प्राकृतिक संसाधनों में हिस्सा कम से कम इतना तो मिलना चाहिए जिस से वह अपना जीवन सम्मान पूर्वक जी सकें
क्या ऊपर के 2-4 करोड़ लोगों को लेकर हम एक विकसित देश बना कर खुश रह सकते हैं ?
कतई नहीं आज की जितनी सरकारी योजनाएं हैं ठीक उसी प्रकार से बनाई चलाई वह जनता तक पहुंचाई जा रही है आज प्रधानमंत्री जी ने भी अपना दुख व्यक्त कर दिया लेकिन ऐसा कोई कारण नहीं है कि यदि प्रधानमंत्री चाहे और चाह कर भी इसका इलाज ना कर पाए
हमारे देश की अधिकांश कमाई उन योजनाओं पर लगाई जा रही है जिन योजनाओं का कोई औचित्य ही नहीं है हर गांव में करोड़ों रुपए महिला चौपाल वृद्धाश्रम वह अलग-अलग जातियों के नाम पर चंद कमरे बनाकर बर्बाद कर दिए गए हैं इसके उलट सरकारी स्कूलों व हस्पतालों में बिल्डिंग या इमारतें कम है अस्त व्यस्त  हैं और कई तो ध्वस्त हैं पर फिर भी हमें पूरी उम्मीद है कि अभी भी समय हाथ में है नरेंद्र मोदी अवश्य इस बात पर गौर करेंगे और अंतिम भारतीय तक समस्त सुख सुविधाएं पहुंचाने का प्रयत्न करेंगे

Sunday, June 7, 2015

ਅਕਾਲ ਤਖ਼ਤ ਤੇ ਅਟੈਕ ਦੀ ਬਰਸੀ ਤੇ ਛਪੇਰੇ ਪ੍ਰਦਰਸਨ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ  ਏ ਸਾਰੀ  ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਚਾਲ ਹੈ ਕ੍ਯੋਂਕੀ ਸ਼ਹੀਦੀ ਤੇ ਸਿਖ ਰੋਂਦੇ ਬਿਲ੍ਖਦੇ ਯਾ  ਅਤਵਾਦੀ ਨਹੀਂ  ਹੋਂਦੇ ਖਾਲਸੇ ਦੀ ਏ ਮਰਯਾਦਾ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕੁਝ ਹਾਰੇ ਹੋਏ  ਜੁਵਾਰੀ ਆਪਣੇ  ਫ਼ਾਯਦੇ ਵਾਸਤੇ ਪਹਲਾ ਤੋਂ ਗੁਮਰਾਹ ਸਿਖ ਨੌਜਵਾਨਾ ਨੂ ਹੋਰ ਗੁਮਰਾਹ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ !
ਸ਼ਹੀਦੀ ਦੀ ਯਾਦਗਾਰ ਤੇ ਛਬੀਲਾਂ ਲਾਇਯਾ ਜਾਂਦਿਯਾ ਹਨ ਤੇ ਲੰਗਰ ਲਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ............

ਯਾਦ ਰਖੋ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਸਵਿਧਾਨ ਏਕ ਏਕ ਅਖਰ ਸਾਡੇ ਗੁਰੂ ਸਾਹਿਬਾਨਾ ਦੇ ਹੁਕਮਾ ਅਨੁਸਾਰ ਹੈ
 ਤੇ ਅਸੀਂ ਹਰ  ਹਾਲ ਚ  ਰਖ੍ਯਾ ਕਰਨੀ ਹੈ
अकाल तख़्त पर हुए हमले की बरसी पर चारों और प्रदर्शन हो रहे हैं ये सब राजनीतिक चाल है क्योंकि शहीदी के बाद  सिख रोते  बिलखते या अतिवादी नहीं होते खालसे की ये मर्यादा ही नहीं है ! कुछ हारे हुए जुवारी अपने फायदे के लिए पहले से गुमराह युवकों को और गुमराह कर रहे हैं

शहीदी की याद में सिख छबीले लगते हैं और लंगर चलते हैं !

याद रखो  हमारे देश का सविधान अक्षरक्ष हमारे गुरु साहिबानो के हुकुम के अनुसार है!

और हमें हर हॉल में इसकी रक्षा करनी है !

Sunday, April 26, 2015

Rashtravadi?????????????

बड़े दिन हुए फेसबुक पर रिएक्टिव हुए जैसे ही पढना शुरू करते हैं हिन्दू हिन्दू मुस्लिम मुस्लिम सिख सिख फलाना फलाना धिम्काना धिम्काना ................................ समझ में नहीं आता क्या फोबिया है कोई योजना नहीं है कोई पॉजिटिव अहसास  नहीं ..........

ऐसा लगता है जैसे 1947 के दौर में पहुच गए हैं ! वो दंगे ..................................मान लिया कांग्रेस ने करवाए थे, बटवारा कांग्रेस ने करवया था, गोडसे ने उनकी हत्या कर दी !

पर अब ये फेसबुक पर जो नफरत कि खेती हो रही है ! वो भी गाँधी कर रहे हैं क्या .....

देश है.... कानून है.... आजादी है.... टेक्नोलॉजी है.... ,,हम एक अतिविकसित देश बना सकते हैं !

पर

 इसमें गलत लिखा है उसमे गलत लिखा है उसने तब गलत किया था इसने तब गलत किया है इसकी क्या जरूरत है ! जो गलत लिखा है वह इसलिए गलत नहीं हो सकता कि आपको गलत लग रहा है !

वो गलत होना चाहिए ......

१ कानून भारत के सविधान के अनुसार .
२ कुदरत के कानून के अनुसार या
३ इंसानियत के खिलाफ

तभी वो गलत है ! कोई अगर अपनी परिभाषा बनाकर खुद को राष्ट्रवादी कहे और राष्ट्रद्रोह करे तो ये ऐसे ही हो जायेगा जैसे कांग्रेस सेकुलेर सेकुलेर कर मुस्लिम तुस्टीकरण करती रही और आलम ये कि सेकुलेर शब्द का असली मतलब ही लोग भूल गए

साथियों राष्ट्रवादी हिन्दू मुस्लिम सिख या इसाई  नहीं होता, राष्ट्रवाद का जो हश्र आप लोग कर रहे है, जानबूझकर या अनजाने में इसका नतीजा बहुत भयानक हो सकता है

पहले विकृत हिंदुत्व कि मार से देश कई बार टूट गया

फिर विकृत इस्लाम ने इसके टुकड़े कर दिया

और इसपर ये विकृत राष्ट्र वाद

देश तो तार तार हो जायेगा

माना कि कुछ लोग देशद्रोही हैं माना कि कुछ लोग स्वार्थी हैं माना कि कुछ लोग गुमराह हैं  उन्हें साम दाम दंड भेत कैसे भी करेंगे सेट कर देंगे !

पर जो राष्ट्रवादी हैं उनका क्या,,,, जाने किस राष्ट्र के राष्ट्रवादी है !

इतिहास हम बदल नहीं सकते उससे सीख ले सकते हैं सीख ले कर इतिहास बना सकते हैं !

हम इन्तजार कर रहे हैं देश में रह रहे बचे खुचे सचे राष्ट्र वादियों का जिन्हें साथ ले कर हम शहीदों के सपनो का भारत बनायेंगे

पर जितना टटोलो उतना ही छंदम राष्ट्रवाद दिखाई पड़ता है! राजनीतिक स्वार्थ  नजर पड़ता हैं





मित्रो राष्ट्रवादी हो और देश के लिए काम करना चाहते हो साथ आयें







Saturday, March 23, 2013

जब maine  kranti  ke  raste  par kadam rakha to maine socha tha ki agar main apna balidaan dekar desh ke sab gali koochon mein "INQLAAB JINDABAAD " ka nara faila sakoon to main samjhuga ki maine apne jivan ka mulya pa liya hai , Aaj jab mein jal ki salakhon ke pichhe se apne karoron deshvasiyon ke gale se isi naare ki dahadti avaj sunta hoon ,

Isase jyada  is chhote se jivan ka kya mulya ho sakta hai


Bhagat Singh

Thursday, March 14, 2013

सरकार की मानसिकता समझ से परे है ! 
दिल्ली में  बलात्कार होता है ! आन्दोलन होता है ! सख्त कानून की मांग उठती है !

 सरकार सेक्स की उम्र अठारह से सोलह कर देती है ! क्यों ?

Friday, February 1, 2013

हमें एक ऐसा भारत चाहिए जहाँ 
  1. जाती और धर्म के नाम पर कोई योजना नहीं होगी !
  2. जहाँ मिनिमम वेजस  में सब  का गुजारा होता हो !
  3. जहाँ अमीर और गरीब की आमदन में जानलेवा अंतर न हो!
  4.  जहाँ कंपनी के नाम पर घोटालों का लिसेंस न मिलता हो!
  5. जहाँ .................
देश में  आज में देख रहा हूँ की राजनितिक पार्टियों के पिट्ठू कभी किसी का और कभी किसी का नाम PM पद के  उछाल रहे हैं ! पर    उनमे से कोई ये दावा,  वादा   करता नहीं दिखता  की क्या होगा, कैसे होगा !

हमें कैसा प्रधान मंत्री चाहिए ?
ऐसा जो की  ....
1. पहले साल में
अ)  जेल में बंद परे सारे गंभीर अपराधियों को फांसी दे दे . और जेल में आम अपराधियों के लिए और गंभीर अपराधियों के लिए अलग अलग वयवस्था करे !
ब)   अदालतों में लटके सभी मामलों के निपटान को सुनिश्चित करे और सुनिश्चित करे की  कोई मामला 1 साल से ज्यादा  न लटके
स)   पूरे देश में  सभी की सम्पति का  सारा ब्यौरा एकत्रित कर सबको राष्ट्रीय कार्ड दे दे !  कार्ड से ज्यादा किसी से  कोई सम्पति  मिले तो वो राष्ट्रीय मानी जाए!

ड)   देश में नागरिक से नागरिक में भेद करने वाले सभी एक्ट निरस्त कर दे !
इ)  एक  आमदन का  ख़ुशी क्षेत्र  तय किया  जाए और सभी देशवासियों को  उसमे ले  जाने की व्यवस्था  की जाए ! ये सुनिश्चित किया जाए की हफ्ते में 5  दिन रोज 8 घंटे कार्य करने वाला कोई भी नागरिक अपना  और अपने माता पिता बीवी व् दो बच्चो का गुजारा शान से चला सके !
फ)  सभी नागरिकों को शिक्षा , सुरक्षा  और स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त मिलें बदले में सभी नागरिक अपनी आमदनी  का कुछ प्रतिशत राष्ट्र को दान दें 
ग)  सभी  सरकारी नौकरियां आर्मी के रस्ते मिलें , ताकि देश को लूटने से पहले वो जान  सकें की कैसे इस देश की हिफाजत की जाती है !
2. दुसरे साल में
अ)   देश के सभी राज्यों  में  बिजली के  परमाणु या किसी  ईंधन से चलने वाले इतने सयंत्र प्लान करे की आने वाले 4 साल में सभी को 24 घंटे  मिल सके !
ब)   देश की सारी आबादी के लिए संचार और यातायात के सुगम और स्वदेशी साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो !
स)  एक सर्वमान्य विवाह कानून बनाया जाए जिससे स्त्री पुरुष की समान भूमिका सुनिश्चित हो और लैंगिक अपराध  नियंत्रित हों
ड)  देश में मोजूद सभी गैरजरूरी टेक्सों को ख़तम किया जाए क्योंकि टेक्स का  उदेश्य सिर्फ
      1. राष्ट्रीय  खर्च की पूर्ति
      2. अमीर गरीब के अंतर को घटाना  और
      3. असामाजिक आर्थिक गतिविधियों को हतोत्साहित  करना ही होना चाहिए
इ)  सभी नागरिक सेवा केन्द्रों पर कंप्यूटर को बिचोलिया  बनाकर अधिकारीयों पर लगाम लगाये
फ) सभी जिला या ब्लाक स्तर पर उपयुक्त केंद्र बनाये  जिसमे सभी अधिकारीयों, पुलिस/ सैनिक, व बेघर लोगों के लिए सुरक्षित निवास हों और सभी सरकारी दफ्तर हों !
ग) पूरे देश में एक समान शिक्षा का पाठ्यक्रम करे ! 
ह) सभी  नौकरियों के लिए 10+2 के बाद परीक्षा हो जिसमे सब  कंप्यूटर द्वारा किया जाए !

Pending...............

Monday, January 28, 2013

दिल्ली  में एक अपराध होता है और जनता  सडको पर इन्साफ के लिए उतर जाती है सरकार पहले इसका विरोध करती है लाठी चार्ज करती है और कुछ  दिन के आन्दोलन के पश्चात कुछ खाना  पूर्ति  करती है !

 अगर ये घटना देश के किसी गाँव में हुई होती या जनता सडको पर न  आती तो क्या होता, इन्साफ तो दूर की बात है ! उस युवती की लाश लेने के लिए भी शायद  पुलिस और हस्पताल के कर्मचारियों को रिश्वत देनी पड़ती !

जी हाँ ऐसे लाखों केस देश में होते हैं जिनके लिए कोई सड़कों पर नहीं आता !

इस सब का समाधान क्या  कठोर सजा ही  है ! या कठोर सजा इसका बदला भर है !
 किसी भी अपराध के तीन अंग होते हैं !
1. अपराधिक मानसिकता
2. अप्राधुप्युक्त माहौल
3. आसान शिकार 

अपराध रोकने के लिए इन तीनों में से किसी एक को हटा दें तो आपराध नहीं होगा 
परन्तु एक अच्छा समाज व  राष्ट्र  बनाने के लिए हमें इन तीनों कारणों को हटाना पड़ेगा 


कठोर सजा इस समस्या का हल नहीं अपितु बदले की कार्यवाही है !
कठोर दंड आवश्यक है पर काफी नहीं , आवश्यक है की सजा हो और  समय से हो .......................................

Tuesday, April 17, 2012

आज भारत के हालात चाहे कुछ भी हों! हमें मायूस नहीं होना है ! ये हालात बदलने हैं ! अगर हम अंग्रेजों के चंगुल से इस देश  को छुड़ा सकते हैं तो इसे दुनिया का सबसे अच्छा रहने लायक स्थान भी बना सकते हैं!
तो हमारी  क्या योजनाये हैं और क्या चुनोतियाँ हैं ! और उनके क्या समाधान हैं!
सबसे पहले क्या ?  चाहते हैं हम!

देश के सविधान के अक्षरक्ष अमल के इलावा हमारा उद्देश्य है की इक ऐसी व्यव्स्था हो की एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति का शोषण न कर सके !
हमारे सपनो के भारत में साथियों ......................... (आप सभी के विचार आमंत्रित हैं)

Monday, April 16, 2012

हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी  धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य  बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सबमें,
व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता  सुनिश्चित कराने वाली, बंधुता बढ़ाने के लिए,
दृढ़ संकल्प होकर अपनी संविधानसभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ईस्वी (मिति माघशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद़ द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।


Sunday, March 25, 2012

साथियों हमें हर गाँव में सेना बनानी है!
ऐसे लोगों की जो अपने बच्चो को अच्छा घर ही नहीं अच्छा देश भी देना चाहते हैं
वो सेना एक इन्टरनेट सर्वर के जरिये आपस में जुडी रहेगी!
और देश के सविधान का उलंघन करने वालों के खिलाफ लड़ेगी
चाहे वो कोई अफसर हो नेता हो या कोई आम आदमी
क्या ऐसा हो पायेगा आपकी क्या राय है ?

Friday, March 23, 2012

देश को चलने के लिए केवल 544+544+12=1100 बन्दे चाहियें क्या बहुत ज्यादा हैं ? नहीं न फिर क्यों देश सही नहीं चल रहा है और चल भी नहीं सकता, जब तक ये लोग अपने बच्चो को विदेश में पढ़ाएंगे कोई भी योजना केवल जाती, धर्म के आधार पर बनाएगे इन्साफ मैं देर लगाएँगे हमें धर्म के नाम पर लड़ायेंगे केवल वोट मांगने गलिओं मैं आएंगे, कुछ भी सुधर करना हो तो सिखने विदेशो मैं जाएँगे और हम इन्ही को चुनते जाएँगे क्या आप इन 1100 में से एक हो सकते हैं ? पर शर्त ये है की बन्दे चाहिएं हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई या पारसी नहीं जाट गुर्जर राजपूत या यादव भी नहीं पंजाबी गुजराती या मराठी भी नहीं चाहियें तो सिर्फ और सिर्फ बन्दे, इंसान , ईन्सनिअत जिनमे कूट - कूट कर भरी हो जो गाँधी जी की सहनशक्ति भगत सिंह का जज्बा सुभाष चंदर बॉस जैसी नेत्रत्व शक्ति और अपने सपनो पर विश्वाश रखते हो क्या आपमें है ये सब , तो ज्वाइन कीजिये एक नयी शुरुवात देश को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की!
आज देश के हालत एक अदद क्रांति के लिए सर्वथा अनुकूल हैं ! बाबु की कलम से लेकर लड़ाकू विमान तक सब सम्मान खो चुके हैं ! स्कूल अध्यापक से लेकर रास्त्रपति तक धूर्त और उद्देश्यहीन हो चुके हैं !

देश की सबसे सशक्त इकाई समाज व्यक्तियों से मिलकर बना है , व्यक्ति कमजोर होंगे तो समाज भी कमजोर होगा और व्यक्तित्व की नीवं बचपन से ही आरंभ होती है!

आज देश का बच्चा होश सँभालते ही अँधा अनुकरण और भोतिक वस्तुओं के लिए तड़प और होड़ देखता है तो वो भी अपने मां बाप की तरह चटक पक्षी की तरह फरफराने लगता है ! किसी किसी घर में ही आवश्यक निति ज्ञान बच्चे को मिल पता है!

आगे का कार्य स्कूल देखते हैं सरकारी स्कूलों में अध्यापक पढ़ाने से ज्यादा बच्चे को डराने या बेगार करवाना अपना अधिकार समझाता है ! पढाता हैं तो डंडा दिखाकर , बच्चे का रट्टू तोता बना देते हैं ! और जो नहीं रटते उन्हें कमजोर बच्चा कहकर हीन भावना का शिकार बना दिया जाता है!

ऐसे देश में जिम्मेदार नागरिक कैसे बनेंगे कैसे ?

Wednesday, March 7, 2012

चुनाव हुआ CM बदला क्या फरक पड़ेगा जो अफसर पैसा ला ला कर मायावती जी को देते थे अब मुलायम जी को दे देंगे
देश में लोकतंत्र के नाम पर एक ठेकेदारी प्रथा चल रही है ! जो ज्यादा बोली लगता है जैसे ज्यादा आरक्षण ज्यादा माफ़ी ज्यादा वाडे ज्यादा दारु वो ठेका ले लेता है ! फिर पांच साल तक वही से कमाता है ! और उन्ही को बांटता है पैर धुलवाता है ! और पता नहीं क्या क्या !

लोकतंत्र की कामयाबी के लिए जरूरी है की सभी लोग व्यवस्था को समझने वाले हो देश का भला बुरा और जरूरत को अच्छी तरह समझते हों !
एक सो इक्कीस करोड़ लोगों को कौन समझाएगा ??
सरकार यानी ठेके दार पर क्यों !
उसे पता है जिस दिन ये लोग समझ गए वो जेल में जाएगा ! वो तो नहीं कभी नहीं!
तो अपने अपने जरिये से लोग समझ रहे हैं और समझा भी रहे हैं देश के लोग जो जागरूक भी है समस्या को एक दुसरे पर थोप रहे हैं ! कोई धार्मिक तो कोई जातीय नजर से समस्या को देख रहा है तो कोई किसी और अच्छे ठेकेदार को तलाश रहा है ! पर बहुत कम इतने से काम नहीं चलेगा पूरे देश को एक ही झटके में न केवल समझाना पड़ेगा बल्कि उन्हें करके दिखाना होगा की अंतर कैसे आ पायेगा! और अंतर आने तक पहरा देना होगा की कोई उन्हें गुमराह न कर पाए!

हमें सभी गाँवों में कम से कम पांच से दस साथी चाहियें जो देश के लिए बिना किसी लालच के अपना बहुमूल्य समय दे पाएं !

Tuesday, February 14, 2012

इस दुनिया में अनेक धर्म हैं और भारत में भी हैं पर कई लोगों को अपना धर्म अच्छा और बाकी सबका बुरा लगता है!
क्यों ?
ये तो मनोविज्ञान का प्रश्न है हर कोई अपने जैसे लोग बढ़ाना चाहता है शायद, पर नहीं अमीर तो नहीं चाहते की और लोग उसकी श्रेणी में आएं, कोई लाभ वाला बिज़नस करने वाला ये नहीं चाहता की कोई उसकी तरह दूकान खोले या फेक्टरी लगाए अगर किसी को सोने की खान का पता चल जाए तो वो किसी को नहीं बताता की खान कहाँ है !

पर अगर किसी को कोई गलत या अनैतिक कार्य करना हो तो वो अवश्य चाहता है की ज्यादा से ज्यादा लोग उसके जैसे हों ! शराबी चाहता हा की सब पियें ! जुआरी चाहता है की सब जुआ खेलें ! या कोई डर के मारे कोई कार्य करता है तो वो चाहता है की ज्यादा लोग उसके साथ आये जैसे अगर किसी गाँव में चोर आ जाएँ और किसी घर में छुप जाए तो कोई अकेला नहीं जाता वहां वो चाहता है की सारा गाँव चले

तो ये धर्म के ठेकेदार हमेशा क्यों चाहते है की ज्यादा लोग इनके धरम को अपनाए ! क्यों जरा गौर करें खुद से ही सवाल करें और खुद ही जवाब दें !
धर्म का क्या स्रोत है ,डर या अनैतिकता ? ज्यादातर धर्म इस धारना पर टिके हैं की इस धर्म के लोगों को स्वर्ग में स्थान मिलेगा किसे मिलेगा उसी व्यक्ति को जो उस धर्म में रहेगा उसके अनुसार चलेगा और ज्यादा लोगों को उससे जोड़ेगा किसी दुसरे को नहीं किसी रिश्तेदार को नहीं सिर्फ उसी को !
तो क्या धर्म एक निहायती व्यक्तिगत विषय नहीं है ? अगर उस धर्म में यह निर्देश न हो की उसका प्रचार करने से बोनस पॉइंट मिलेंगे ?

आज से करीब २००० साल पहले दुनिया में सभ्यता बहुत छिन्न भिन्न थी छोटे छोटे काबिले थे उनके सरदार थे जो ज्यादातर शारीरिक शक्ति के आधार पर चुने जाते थे जैसे आज भी सभी झुण्ड में रहने वाले जानकारों में होता है।

दिमाग का विकास हुआ तो कुछ लोगों ने साम दाम दंड भेद की खोज कर ली शारीरिक शक्ति के इलावा लोगों को समझाकर कोई लालच देकर डराकार या गुमराह कर अपने साथ रखने लगे और जिसके साथ ज्यादा लोग वो राजा
एक बार राजा बन जाने से समस्या समाप्त नहीं होती थी राजा के जरा सा कमजोर पड़ते ही उसे मार दिया जाता।

तो ईश्वर की इजाद भी किसी ने कर ही दी राजा उसका प्रतिनिधि है। भगवान एक सर्वशक्तिमान जो अनुचित कार्यों की सजा देता है और अच्छे कार्य का इनाम
लोगों ने देखा और कुछ बुद्धिजीवी व्यक्तियों ने देखा की फलां ने अनुचित कार्य किया और सजा नहीं मिली वो तो मजे में है! तो अगले जनम और पिछले जनम की भी खोज हुई ! बोला सजा अगले जन्म में मिलेगी अगर किसी को दुःख हुआ और उसने पूछा की मैंने तो कोई पाप नहीं किया तो उसे कहा गया पिछले जन्म की सजा है !
२००० साल ऐसे ही बीत गए इंसान ने ब्रह्माण्ड को छान मारा इश्वर की क्रोप कही जाने वाली बीमारियों पर विजय हुई !

इस दौरान न जाने कितने धर्म बने और बिगड़े कुछ कम फैले कुछ ज्यादा पर सभी धर्मों की मान्यताये देखकर उन हालात का अनुमान लगता है जिनमे वो पनपे हैं !
21st शताब्दी का धरम लोकतंत्र है ! जिसमे सभी समान हैं और समान अधिकार रखते हैं ! कोई किसी पर राज नहीं करता और न ही शोषण कर सकता है !

परन्तु कुछ शरारती तत्व ऐसे भी हैं !
जो इस लोकतंत्र के खिलाडी हैं और नए नए तरीके से राजा बने हुए हैं ! पर ज्यादा दिन तक नहीं ।
जो अभी भी वोही पुराना स्वर्ग का लालच दिखाकर और नरक से डराकर राज करने की इच्छा रखते हैं ! पर आज वैज्ञानिक युग के लोग स्वर्ग पाने में नहीं स्वर्ग बनाने में यकीन करेंगे और और बना लेंगे।
Sahab Singh at 8:16 AM
Tuesday, February 14, 2012
देशभक्तों सेse humara agrah hai ki ek baar hindu muslim sikh isai ke chole se bahar nikalkar ............ sirf desh ko aage rakhkar sochen aur bataayen ki hinduon mein muslims ke prati aur muslims mein hindus ke prati jo nafrat hai vo humen kahan le kar jaa rahi hai .... कहाँ backround mein jaate hain..... batwaare ka dosh poori tarah se gandhi g par madha jaata hai par aaj ke haalat dekh kar humen lagta hai ki gandhi g ka koi dosh nahin tha itni kattarta se sirf batwara hi ho sakta hai aur kuchh nahin batwaare se kya fayda hua

1. bhi nahin (fayda hua par US aur UK ko)
aur nuksaan

1. ek shaktishaali desh bharat jisne vishvyudh mein vijay hasil kar duniya ki dhuri badal di do hisso mein bant gaya
2. ek doosre ka jaani dushman ban gaye jinke liye anaaj ugaane se jyadan jaroori hathiyaar kharidna tha
3. is apsi dushmani ke chalte aaj 1 $ lagbhag 50 rs ke barabar hai unhone taraaki ki aur humne barbaadi
4. lakho log maare gaye jisme utne hi muslim bhi the aur hindu sikh bhi
5. aaj bhi agar ek insaan bhi agar chaahe humaare desh mein dange karwa sakta hai humen maarne ke liye RDX ki jaroorat nahin hai ek koyla hi kaafi hai dange bharkaane ke liye
6. akela bharat bhi kaaafi hai poori duniya se liha le sakta hai par hum aaj bhi deshbhakti ke mayne nahin samjhe hain humen dharam desh se jyada pyaara hai hai to theek hai dharam rahega par desh nahin bachega nahin bachega bachenge to chhote chhote tukre jo kuchh hindu kuchh muslim aur kuchh sikh honge par bharat nahin honge aur jitne tukre utne dange utna khoon sabka hoga apna apna desh
7 par ek ko doosre se gehun leni hogi to via UK ayegi ya china ya nepal aur tarki ke naam par hathiyaar kharide jayenge vahin se UK se Itlay se ya franse se

Sabhi sathiyon se hum Rastrabhakti ka ahvaaan karte hain, kisi maan ke do bete jab apas mein ladte hain to uska kya haal hota hai ye vo maan hi jaanti hai us maan ke dard ko samjho rok lo ye nafrat ki andhi rok lo....................

http://www.facebook.com/groups/force4u/

Friday, February 10, 2012

एक बार कुछ मित्र एक जहाज से सफ़र कर रहे थे की अचानक जहाज पर रह रहे चूहों ने जहाज की तली में दो छेद कर दिए । चारों लोग घबरा गए जहाज में पानी भरने लगा उनमे से एक बोला हमारा जहाज डूब जायेगा इस छेड़ को बंद करना होगा। तो दूसरा बोला हाँ बंद करना पड़ेगा। तीसरा बोला तुम्हे परेशान होना है होते रहो जब तक जहाज में पानी भरेगा हम किनारे जा पहुचेंगे । चौथा बोला और अगर न भी पहुंचे मेरे पास तो लाइफ जेच्केट है । मुझे परेशान होने की जरूरत नहीं है , पांचवां बोला में जहाज के भरोसे नहीं इश्वर के भरोसे चल रहा हूँ । इश्वर हमारी मदद कारागा और जहाज को पार लगाएगा । छटा बोला मरने का वकत आ गया है खा लो पि लो ऐश करलो और शराब की बोतल खोल कर पीने लगा, तीसरा और चौथा भी उसे कंपनी करने लगे पहले और दुसरे ने उन्हें सम्झ्हने की कोशिश की पर वो न माने पांचवां इश्वर की तस्वीर के आगे प्राथना करने बैठ गया आखिर वो दोनों छेदों बंद करने का पर्यास करने लगे पर उन्हें ऐसा कोई सामान ना मिला । तभी पहले को सूझा और उसने कहा की दोनों छेदों पर हाथ रख कर बैठ जाते हैं ! दूसरा पहले तो नहीं माना पर जब पानी बंद न हुआ तो वह भी छेड़ पर हाथ रख कर बैठ गया । उन्होंने पानी का आना बंद कर दिया था पर जहाज में बहुत पानी भर गया था । उन्होंने सभी से कहा की जहाज से पानी बहार निकल दो भाई पर सबने उनका मजाक उड़ाया । उन्हें बैठे बैठे बहुत ठण्ड लग रही थी ऊपर से वो दोनों पानी के अन्दर बैठे थे ।
उन्हें भूख लगी तो उन्होंने अपने बाकी साथियों से कहा की खाना तो हमें खिला दो पर तीसरा दूरबीन से किनारा ढूँढने लगा, चौथा अपनी लाइफ जाकेट को सवारने लगा।

तो पहले ने दुसरे से कहा की भाई तुम ही उठो और खाना बना लो मैं दोनों छेदों पर हाथ रखता हूँ । इस पर दुसरे को बहुत गुस्सा आया और बोला की तुम लोग काफ़िर हो और में तुम्हारा काम नहीं करूंगा हम दोनों अपना अपना छेद ही बंद रखेंगे तुम्हारा और हमारा कोई मेल नहीं है । और मुझे भूख नहीं है । यह सुनकर पहला निराश हो गया उसने उम्मीद से बाकी साथियों की और देखा , तीसरा और छठा शराब के नशे में मदहोश थे और पांचवें ने लाइफ जाकेट पहनकर समंदर में छलांग लगा दी थी । और भूख के चलते पहला बेहोश हो गया और गिर गया । पानी अब पहले वाले छेद में से अन्दर आने लगा उसने उसे रोकने के लिए उस पर अपना दूसरा हाथ अनमने ढंग से रख दिया और बैठ गया । रात हुई तो उसे भी भूख सताने लगी पर अब उसकी मदद के लिए कोई नहीं था। और आखिर वो भी चल बसा । पानी छेदों में से अन्दर आता रहा और आखिर जहाज डूब गया ............... क्या ये अंजाम ठीक है क्या ये अंजाम आपको मंजूर है? अगर है तो लगे रहिये अपने अपने रास्ते।
पिछले ६२ साल में क्या हुआ क्या नहीं बहुत चर्चा हो चुकी अब हमें आज यहाँ से शुरू करना है। देश आजाद है नागरिक आजाद हैं अपना देश केवल सँभालने की जरूरत है.
हमारा देश भारत या कोई भी सवतंत्र राष्ट्र एक परिवार की तरह होता है! चाहे उसमे कुछ लाख और चाहे कई करोड़ लोग रहते हों ! एक देश या परिवार के साथ कुछ उतरदायित्व जुड़े होते हैं जो उसके सदस्यों या उसके मुखिया को निभाने पड़ते हैं! जो निम्न हैं!
अ - देश को बाहरी आक्रमणकारियों से बचाना व् इसके लिए तैयार रहना !
ब - देश के भीतर नागरिकों का चोरों लुटेरों और देश द्रोहियों से बचाव करना और व्यवस्था बनाए रखना!
स - देश के सभी नागरिकों को यथासंभव सभी सुख सुविधाएं उपलब्ध करवाना!
ल - देश के सभी नागरिकों को उनकी योग्यता के hisab से काम उपलब्ध करवाना!
ह - दुनिया के अन्य देशो से बेहतर तालमेल बनाना और प्रतिश्पर्धा में बने रहना!

क्या आप सहमत हैं ! यदि हाँ तो कौन सा कार्य किस क्रम पर आता है बताएं जैसे
१ अ २ ब ३ स ४ ल ५ ह
और अगर नहीं तो क्यों कृपया लिखें !

Friday, February 3, 2012

लोकतंत्र ऐसी व्यवस्था है की जिसमे देश के सभी नागरिक देश को चलाते हैं और तो देश का रजा कौन हुआ देश के सब नागरिक अधिकाँश नागरिक जो चाहेंगे वो होगा तो एक अछ्छे शाशन के लिए जरूरी है की सारी नहीं तो अधिकाँश जनता पढ़ी लिखी सविधान को समझाने वाली और और उस पर अमल करने वाली हो ! जैसे पुरातन काल में राजकुमारों को चहुमुखी शिक्षा दी जाती थी वो हर एक नागरिक को मिलनी चाहिए हर बच्चे को मिलनी चाहिए इसके लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान और ढांचा है ! पर कुछ रिश्वतखोर और आत्मकेंद्रित बीमार मानसिकता के शिकार लोगों ने उसे बेहद बुरे हालात में पंहुचा दिया है ! देश के कानून में मोजूद व्यवस्था इसे ठीक नहीं कर प् रही और हमारी मौन सविक्रिती भी इस के लिए जिम्मेदार है ! तो समाधान क्या है ?


देश के ६३६००० गावों में खुले स्कूलों में सुधार लाने के लिए हमें हर गाँव में हर स्कूल पर नजर रखनी होगी , ऐसी नजर अलग अलग लोग नहीं रख सकते और मोजूदा व्यवस्था से नहीं लड़ सकते इसके लिए हमें एक सयुक्त प्रयास की जरूरत है और इस सयुंक्त प्रयास का नाम हमने रखा है भारतीय सामाजिक सेना

तो आपको यदि किसी और से उम्मीद है या आपको देश के हालात से कुछ लेना देना नहीं है तो मोजुदा वयवस्था को कोसते रहेन पर अगर आप समझाते हैं की जजों करना है हमें करना है तो आगे बढ़ो और ज्वाइन करो इंडियन सोसिअल फाॅर्स ISF वन्दे मातरम