दिल्ली में एक अपराध होता है और जनता सडको पर इन्साफ के लिए उतर जाती है सरकार पहले इसका विरोध करती है लाठी चार्ज करती है और कुछ दिन के आन्दोलन के पश्चात कुछ खाना पूर्ति करती है !
अगर ये घटना देश के किसी गाँव में हुई होती या जनता सडको पर न आती तो क्या होता, इन्साफ तो दूर की बात है ! उस युवती की लाश लेने के लिए भी शायद पुलिस और हस्पताल के कर्मचारियों को रिश्वत देनी पड़ती !
जी हाँ ऐसे लाखों केस देश में होते हैं जिनके लिए कोई सड़कों पर नहीं आता !
इस सब का समाधान क्या कठोर सजा ही है ! या कठोर सजा इसका बदला भर है !
किसी भी अपराध के तीन अंग होते हैं !
1. अपराधिक मानसिकता
2. अप्राधुप्युक्त माहौल
3. आसान शिकार
अपराध रोकने के लिए इन तीनों में से किसी एक को हटा दें तो आपराध नहीं होगा
परन्तु एक अच्छा समाज व राष्ट्र बनाने के लिए हमें इन तीनों कारणों को हटाना पड़ेगा
कठोर सजा इस समस्या का हल नहीं अपितु बदले की कार्यवाही है !
कठोर दंड आवश्यक है पर काफी नहीं , आवश्यक है की सजा हो और समय से हो .......................................
अगर ये घटना देश के किसी गाँव में हुई होती या जनता सडको पर न आती तो क्या होता, इन्साफ तो दूर की बात है ! उस युवती की लाश लेने के लिए भी शायद पुलिस और हस्पताल के कर्मचारियों को रिश्वत देनी पड़ती !
जी हाँ ऐसे लाखों केस देश में होते हैं जिनके लिए कोई सड़कों पर नहीं आता !
इस सब का समाधान क्या कठोर सजा ही है ! या कठोर सजा इसका बदला भर है !
किसी भी अपराध के तीन अंग होते हैं !
1. अपराधिक मानसिकता
2. अप्राधुप्युक्त माहौल
3. आसान शिकार
अपराध रोकने के लिए इन तीनों में से किसी एक को हटा दें तो आपराध नहीं होगा
परन्तु एक अच्छा समाज व राष्ट्र बनाने के लिए हमें इन तीनों कारणों को हटाना पड़ेगा
कठोर सजा इस समस्या का हल नहीं अपितु बदले की कार्यवाही है !
कठोर दंड आवश्यक है पर काफी नहीं , आवश्यक है की सजा हो और समय से हो .......................................
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