चुनाव हुआ CM बदला क्या फरक पड़ेगा जो अफसर पैसा ला ला कर मायावती जी को देते थे अब मुलायम जी को दे देंगे
देश में लोकतंत्र के नाम पर एक ठेकेदारी प्रथा चल रही है ! जो ज्यादा बोली लगता है जैसे ज्यादा आरक्षण ज्यादा माफ़ी ज्यादा वाडे ज्यादा दारु वो ठेका ले लेता है ! फिर पांच साल तक वही से कमाता है ! और उन्ही को बांटता है पैर धुलवाता है ! और पता नहीं क्या क्या !
लोकतंत्र की कामयाबी के लिए जरूरी है की सभी लोग व्यवस्था को समझने वाले हो देश का भला बुरा और जरूरत को अच्छी तरह समझते हों !
एक सो इक्कीस करोड़ लोगों को कौन समझाएगा ??
सरकार यानी ठेके दार पर क्यों !
उसे पता है जिस दिन ये लोग समझ गए वो जेल में जाएगा ! वो तो नहीं कभी नहीं!
तो अपने अपने जरिये से लोग समझ रहे हैं और समझा भी रहे हैं देश के लोग जो जागरूक भी है समस्या को एक दुसरे पर थोप रहे हैं ! कोई धार्मिक तो कोई जातीय नजर से समस्या को देख रहा है तो कोई किसी और अच्छे ठेकेदार को तलाश रहा है ! पर बहुत कम इतने से काम नहीं चलेगा पूरे देश को एक ही झटके में न केवल समझाना पड़ेगा बल्कि उन्हें करके दिखाना होगा की अंतर कैसे आ पायेगा! और अंतर आने तक पहरा देना होगा की कोई उन्हें गुमराह न कर पाए!
हमें सभी गाँवों में कम से कम पांच से दस साथी चाहियें जो देश के लिए बिना किसी लालच के अपना बहुमूल्य समय दे पाएं !
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