Saturday, September 10, 2016

हमने बचपन में साइंस की पुस्तक में पड़ा था अनुकूलन के बारे में और सोचा था की ये बहुत अच्छा गुण है और इसके सिर्फ फायदे ही फायदे हैं पर आज इस अनुकूलन का बहुत ही बड़ा दुष्प्रभाव हमारे सामने हैं ! यही अनुकूलन का गुण हमारा दुश्मन बनकर बैठ गया है ! अनुकूलन की वजह से ही हम विभिन परिस्थितियों में विभिन मौसमों में जिन्दा रह पाते हैं !
शायद इसी अनुकूलन की वजह से ही आज हम दम घोटने वाली इस राजनातिक व्यवस्था में जिन्दा हैं! मुठ्ठीभर लोग हमारे देश को लूट रहे हैं ! हमें बुद्धू बना रहे हैं , आपस में लडवा रहे हैं ! हम झंडे उठाये उनके पीछे जिंदाबाद - जिंदाबाद चिल्ला रहे हैं !

चाहिए तो ये था की लाखों कुर्बानियों से मिली आजादी को हम कम से कम इस्तेमाल तो करते तो भी हमारे शहीदों को एक श्रधांजली होती !
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने 2 साल  के करीब हो गया विकास तो हम कह नहीं सकते लेकिन परिवर्तन नजर आ रहा है आसपास के देशों में हलचल है मीडिया चाहे कोई भी हो बहुत शोर मचा रहा है जैसे कि हमें नरेंद्र मोदी से उम्मीद थी उतना नहीं तो उससे हम पर कुछ वैसा ही अंतर नजर आ रहा है

इस परिवर्तन का अंजाम क्या होगा यह तो अभी नहीं कह सकते क्योंकि ज्यादा बड़ा खतरा इस बात से है

 क्योंकि रामराज्य और रावण राज्य में कोई खास फर्क नहीं होता रावण राज्य  भी बेहद प्रतिष्ठित व सर्व साधन संपन्न था जहां पूरी लंका ही सोने की थी आसपास के देशों में उसका भय था रामराज्य में भी कुछ ऐसा ही था जनता सर्व साधन संपन्न ना भि हो परंतु उन्मुक्त स्वच्छंद वह संतुलित जीवन जीती थी राजा राजा ना होकर सेवक था छोटे से छोटे व्यक्ति की बात भी सुनी जाती थी परंतु रावण राज में ऐसा नहीं था अपने सगे भाई की बात भी नहीं सुनी जाती थी

आज के परिवेश को देखते हैं तो मोदी राज रावण राज से ज्यादा मिलता-जुलता है किसी पार्टी से कोई गिला शिकवा नहीं है दोस्तों मन में आई तो लिख दिया
हमें परिवर्तन चाहिए
लेकिन उस परिवर्तन में हम चाहते हैं कि देश के अधिकांश लोग सर्व साधन संपन्न ना भी हो लेकिन उन्हें अपने मौलिक अधिकार व प्राकृतिक संसाधनों में हिस्सा कम से कम इतना तो मिलना चाहिए जिस से वह अपना जीवन सम्मान पूर्वक जी सकें
क्या ऊपर के 2-4 करोड़ लोगों को लेकर हम एक विकसित देश बना कर खुश रह सकते हैं ?
कतई नहीं आज की जितनी सरकारी योजनाएं हैं ठीक उसी प्रकार से बनाई चलाई वह जनता तक पहुंचाई जा रही है आज प्रधानमंत्री जी ने भी अपना दुख व्यक्त कर दिया लेकिन ऐसा कोई कारण नहीं है कि यदि प्रधानमंत्री चाहे और चाह कर भी इसका इलाज ना कर पाए
हमारे देश की अधिकांश कमाई उन योजनाओं पर लगाई जा रही है जिन योजनाओं का कोई औचित्य ही नहीं है हर गांव में करोड़ों रुपए महिला चौपाल वृद्धाश्रम वह अलग-अलग जातियों के नाम पर चंद कमरे बनाकर बर्बाद कर दिए गए हैं इसके उलट सरकारी स्कूलों व हस्पतालों में बिल्डिंग या इमारतें कम है अस्त व्यस्त  हैं और कई तो ध्वस्त हैं पर फिर भी हमें पूरी उम्मीद है कि अभी भी समय हाथ में है नरेंद्र मोदी अवश्य इस बात पर गौर करेंगे और अंतिम भारतीय तक समस्त सुख सुविधाएं पहुंचाने का प्रयत्न करेंगे