हमने बचपन में साइंस की पुस्तक में पड़ा था अनुकूलन के बारे में और सोचा था की ये बहुत अच्छा गुण है और इसके सिर्फ फायदे ही फायदे हैं पर आज इस अनुकूलन का बहुत ही बड़ा दुष्प्रभाव हमारे सामने हैं ! यही अनुकूलन का गुण हमारा दुश्मन बनकर बैठ गया है ! अनुकूलन की वजह से ही हम विभिन परिस्थितियों में विभिन मौसमों में जिन्दा रह पाते हैं !
शायद इसी अनुकूलन की वजह से ही आज हम दम घोटने वाली इस राजनातिक व्यवस्था में जिन्दा हैं! मुठ्ठीभर लोग हमारे देश को लूट रहे हैं ! हमें बुद्धू बना रहे हैं , आपस में लडवा रहे हैं ! और हम झंडे उठाये उनके पीछे जिंदाबाद - जिंदाबाद चिल्ला रहे हैं !
चाहिए तो ये था की लाखों कुर्बानियों से मिली आजादी को हम कम से कम इस्तेमाल तो करते तो भी हमारे शहीदों को एक श्रधांजली होती !
शायद इसी अनुकूलन की वजह से ही आज हम दम घोटने वाली इस राजनातिक व्यवस्था में जिन्दा हैं! मुठ्ठीभर लोग हमारे देश को लूट रहे हैं ! हमें बुद्धू बना रहे हैं , आपस में लडवा रहे हैं ! और हम झंडे उठाये उनके पीछे जिंदाबाद - जिंदाबाद चिल्ला रहे हैं !
चाहिए तो ये था की लाखों कुर्बानियों से मिली आजादी को हम कम से कम इस्तेमाल तो करते तो भी हमारे शहीदों को एक श्रधांजली होती !