आज चारों तरफ बाढ़ का प्रकोप है ! बाढ़ का मतलब केवल बाढ़ नहीं इसके साथ आती हैं हजारों बीमारियाँ और भुखमरी, परन्तु हमारे नेताओं को इसकी नहीं अपनी सैलरी की फिकर है ! यह स्पष्ट है की आज भी देश में एक विशेष तबका है जो खुद को इंसान कहलाता है और सभी नीतिया केवल उसी तबके के लिए बनती हैं ! वो जो सरकारी नौकर हैं, वो जो नेता हैं, या वो जो उधोगपति हैं !
इसके इलावा देश में पैदा हुए लोग केवल इसी की सजा भुगत रहे हैं की वो भारत में पैदा हुए हैं ! की १० -१० घंटे काम करके भी उन्हें १०० रूपए मिलते हैं ! देश का कोई मंत्री या अफसर बता दे की कैसे गुजारा हो सकता है ! ये १०० तो केवल उन खुशकिस्मत लोगो को मिलते हैं जो किसी अछ्छी जगह काम ढूढ़ लेते हैं ! बाकी को मिलता है २० ३० या ५० !
मेरी अपील है राहुल गाँधी से सोनिया गाँधी से प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह से की इस बार बजट बनाए तो ऐसा की मिनिमुम वेजुस से एक परिवार का गुजारा हो ! या तो छोड़ दे कुर्सी क्योंकि कोंग्रेस का एकाधिकार देश पर भारी पद रहा है !
वन्दे मातरम