बड़े दिन हुए फेसबुक पर रिएक्टिव हुए जैसे ही पढना शुरू करते हैं हिन्दू हिन्दू मुस्लिम मुस्लिम सिख सिख फलाना फलाना धिम्काना धिम्काना ................................ समझ में नहीं आता क्या फोबिया है कोई योजना नहीं है कोई पॉजिटिव अहसास नहीं ..........
ऐसा लगता है जैसे 1947 के दौर में पहुच गए हैं ! वो दंगे ..................................मान लिया कांग्रेस ने करवाए थे, बटवारा कांग्रेस ने करवया था, गोडसे ने उनकी हत्या कर दी !
पर अब ये फेसबुक पर जो नफरत कि खेती हो रही है ! वो भी गाँधी कर रहे हैं क्या .....
देश है.... कानून है.... आजादी है.... टेक्नोलॉजी है.... ,,हम एक अतिविकसित देश बना सकते हैं !
पर
इसमें गलत लिखा है उसमे गलत लिखा है उसने तब गलत किया था इसने तब गलत किया है इसकी क्या जरूरत है ! जो गलत लिखा है वह इसलिए गलत नहीं हो सकता कि आपको गलत लग रहा है !
वो गलत होना चाहिए ......
१ कानून भारत के सविधान के अनुसार .
२ कुदरत के कानून के अनुसार या
३ इंसानियत के खिलाफ
तभी वो गलत है ! कोई अगर अपनी परिभाषा बनाकर खुद को राष्ट्रवादी कहे और राष्ट्रद्रोह करे तो ये ऐसे ही हो जायेगा जैसे कांग्रेस सेकुलेर सेकुलेर कर मुस्लिम तुस्टीकरण करती रही और आलम ये कि सेकुलेर शब्द का असली मतलब ही लोग भूल गए
साथियों राष्ट्रवादी हिन्दू मुस्लिम सिख या इसाई नहीं होता, राष्ट्रवाद का जो हश्र आप लोग कर रहे है, जानबूझकर या अनजाने में इसका नतीजा बहुत भयानक हो सकता है
पहले विकृत हिंदुत्व कि मार से देश कई बार टूट गया
फिर विकृत इस्लाम ने इसके टुकड़े कर दिया
और इसपर ये विकृत राष्ट्र वाद
देश तो तार तार हो जायेगा
माना कि कुछ लोग देशद्रोही हैं माना कि कुछ लोग स्वार्थी हैं माना कि कुछ लोग गुमराह हैं उन्हें साम दाम दंड भेत कैसे भी करेंगे सेट कर देंगे !
पर जो राष्ट्रवादी हैं उनका क्या,,,, जाने किस राष्ट्र के राष्ट्रवादी है !
इतिहास हम बदल नहीं सकते उससे सीख ले सकते हैं सीख ले कर इतिहास बना सकते हैं !
हम इन्तजार कर रहे हैं देश में रह रहे बचे खुचे सचे राष्ट्र वादियों का जिन्हें साथ ले कर हम शहीदों के सपनो का भारत बनायेंगे
पर जितना टटोलो उतना ही छंदम राष्ट्रवाद दिखाई पड़ता है! राजनीतिक स्वार्थ नजर पड़ता हैं
मित्रो राष्ट्रवादी हो और देश के लिए काम करना चाहते हो साथ आयें
ऐसा लगता है जैसे 1947 के दौर में पहुच गए हैं ! वो दंगे ..................................मान लिया कांग्रेस ने करवाए थे, बटवारा कांग्रेस ने करवया था, गोडसे ने उनकी हत्या कर दी !
पर अब ये फेसबुक पर जो नफरत कि खेती हो रही है ! वो भी गाँधी कर रहे हैं क्या .....
देश है.... कानून है.... आजादी है.... टेक्नोलॉजी है.... ,,हम एक अतिविकसित देश बना सकते हैं !
पर
इसमें गलत लिखा है उसमे गलत लिखा है उसने तब गलत किया था इसने तब गलत किया है इसकी क्या जरूरत है ! जो गलत लिखा है वह इसलिए गलत नहीं हो सकता कि आपको गलत लग रहा है !
वो गलत होना चाहिए ......
१ कानून भारत के सविधान के अनुसार .
२ कुदरत के कानून के अनुसार या
३ इंसानियत के खिलाफ
तभी वो गलत है ! कोई अगर अपनी परिभाषा बनाकर खुद को राष्ट्रवादी कहे और राष्ट्रद्रोह करे तो ये ऐसे ही हो जायेगा जैसे कांग्रेस सेकुलेर सेकुलेर कर मुस्लिम तुस्टीकरण करती रही और आलम ये कि सेकुलेर शब्द का असली मतलब ही लोग भूल गए
साथियों राष्ट्रवादी हिन्दू मुस्लिम सिख या इसाई नहीं होता, राष्ट्रवाद का जो हश्र आप लोग कर रहे है, जानबूझकर या अनजाने में इसका नतीजा बहुत भयानक हो सकता है
पहले विकृत हिंदुत्व कि मार से देश कई बार टूट गया
फिर विकृत इस्लाम ने इसके टुकड़े कर दिया
और इसपर ये विकृत राष्ट्र वाद
देश तो तार तार हो जायेगा
माना कि कुछ लोग देशद्रोही हैं माना कि कुछ लोग स्वार्थी हैं माना कि कुछ लोग गुमराह हैं उन्हें साम दाम दंड भेत कैसे भी करेंगे सेट कर देंगे !
पर जो राष्ट्रवादी हैं उनका क्या,,,, जाने किस राष्ट्र के राष्ट्रवादी है !
इतिहास हम बदल नहीं सकते उससे सीख ले सकते हैं सीख ले कर इतिहास बना सकते हैं !
हम इन्तजार कर रहे हैं देश में रह रहे बचे खुचे सचे राष्ट्र वादियों का जिन्हें साथ ले कर हम शहीदों के सपनो का भारत बनायेंगे
पर जितना टटोलो उतना ही छंदम राष्ट्रवाद दिखाई पड़ता है! राजनीतिक स्वार्थ नजर पड़ता हैं
मित्रो राष्ट्रवादी हो और देश के लिए काम करना चाहते हो साथ आयें