Friday, March 23, 2012

आज देश के हालत एक अदद क्रांति के लिए सर्वथा अनुकूल हैं ! बाबु की कलम से लेकर लड़ाकू विमान तक सब सम्मान खो चुके हैं ! स्कूल अध्यापक से लेकर रास्त्रपति तक धूर्त और उद्देश्यहीन हो चुके हैं !

देश की सबसे सशक्त इकाई समाज व्यक्तियों से मिलकर बना है , व्यक्ति कमजोर होंगे तो समाज भी कमजोर होगा और व्यक्तित्व की नीवं बचपन से ही आरंभ होती है!

आज देश का बच्चा होश सँभालते ही अँधा अनुकरण और भोतिक वस्तुओं के लिए तड़प और होड़ देखता है तो वो भी अपने मां बाप की तरह चटक पक्षी की तरह फरफराने लगता है ! किसी किसी घर में ही आवश्यक निति ज्ञान बच्चे को मिल पता है!

आगे का कार्य स्कूल देखते हैं सरकारी स्कूलों में अध्यापक पढ़ाने से ज्यादा बच्चे को डराने या बेगार करवाना अपना अधिकार समझाता है ! पढाता हैं तो डंडा दिखाकर , बच्चे का रट्टू तोता बना देते हैं ! और जो नहीं रटते उन्हें कमजोर बच्चा कहकर हीन भावना का शिकार बना दिया जाता है!

ऐसे देश में जिम्मेदार नागरिक कैसे बनेंगे कैसे ?

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