Sunday, March 25, 2012

साथियों हमें हर गाँव में सेना बनानी है!
ऐसे लोगों की जो अपने बच्चो को अच्छा घर ही नहीं अच्छा देश भी देना चाहते हैं
वो सेना एक इन्टरनेट सर्वर के जरिये आपस में जुडी रहेगी!
और देश के सविधान का उलंघन करने वालों के खिलाफ लड़ेगी
चाहे वो कोई अफसर हो नेता हो या कोई आम आदमी
क्या ऐसा हो पायेगा आपकी क्या राय है ?

Friday, March 23, 2012

देश को चलने के लिए केवल 544+544+12=1100 बन्दे चाहियें क्या बहुत ज्यादा हैं ? नहीं न फिर क्यों देश सही नहीं चल रहा है और चल भी नहीं सकता, जब तक ये लोग अपने बच्चो को विदेश में पढ़ाएंगे कोई भी योजना केवल जाती, धर्म के आधार पर बनाएगे इन्साफ मैं देर लगाएँगे हमें धर्म के नाम पर लड़ायेंगे केवल वोट मांगने गलिओं मैं आएंगे, कुछ भी सुधर करना हो तो सिखने विदेशो मैं जाएँगे और हम इन्ही को चुनते जाएँगे क्या आप इन 1100 में से एक हो सकते हैं ? पर शर्त ये है की बन्दे चाहिएं हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई या पारसी नहीं जाट गुर्जर राजपूत या यादव भी नहीं पंजाबी गुजराती या मराठी भी नहीं चाहियें तो सिर्फ और सिर्फ बन्दे, इंसान , ईन्सनिअत जिनमे कूट - कूट कर भरी हो जो गाँधी जी की सहनशक्ति भगत सिंह का जज्बा सुभाष चंदर बॉस जैसी नेत्रत्व शक्ति और अपने सपनो पर विश्वाश रखते हो क्या आपमें है ये सब , तो ज्वाइन कीजिये एक नयी शुरुवात देश को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की!
आज देश के हालत एक अदद क्रांति के लिए सर्वथा अनुकूल हैं ! बाबु की कलम से लेकर लड़ाकू विमान तक सब सम्मान खो चुके हैं ! स्कूल अध्यापक से लेकर रास्त्रपति तक धूर्त और उद्देश्यहीन हो चुके हैं !

देश की सबसे सशक्त इकाई समाज व्यक्तियों से मिलकर बना है , व्यक्ति कमजोर होंगे तो समाज भी कमजोर होगा और व्यक्तित्व की नीवं बचपन से ही आरंभ होती है!

आज देश का बच्चा होश सँभालते ही अँधा अनुकरण और भोतिक वस्तुओं के लिए तड़प और होड़ देखता है तो वो भी अपने मां बाप की तरह चटक पक्षी की तरह फरफराने लगता है ! किसी किसी घर में ही आवश्यक निति ज्ञान बच्चे को मिल पता है!

आगे का कार्य स्कूल देखते हैं सरकारी स्कूलों में अध्यापक पढ़ाने से ज्यादा बच्चे को डराने या बेगार करवाना अपना अधिकार समझाता है ! पढाता हैं तो डंडा दिखाकर , बच्चे का रट्टू तोता बना देते हैं ! और जो नहीं रटते उन्हें कमजोर बच्चा कहकर हीन भावना का शिकार बना दिया जाता है!

ऐसे देश में जिम्मेदार नागरिक कैसे बनेंगे कैसे ?

Wednesday, March 7, 2012

चुनाव हुआ CM बदला क्या फरक पड़ेगा जो अफसर पैसा ला ला कर मायावती जी को देते थे अब मुलायम जी को दे देंगे
देश में लोकतंत्र के नाम पर एक ठेकेदारी प्रथा चल रही है ! जो ज्यादा बोली लगता है जैसे ज्यादा आरक्षण ज्यादा माफ़ी ज्यादा वाडे ज्यादा दारु वो ठेका ले लेता है ! फिर पांच साल तक वही से कमाता है ! और उन्ही को बांटता है पैर धुलवाता है ! और पता नहीं क्या क्या !

लोकतंत्र की कामयाबी के लिए जरूरी है की सभी लोग व्यवस्था को समझने वाले हो देश का भला बुरा और जरूरत को अच्छी तरह समझते हों !
एक सो इक्कीस करोड़ लोगों को कौन समझाएगा ??
सरकार यानी ठेके दार पर क्यों !
उसे पता है जिस दिन ये लोग समझ गए वो जेल में जाएगा ! वो तो नहीं कभी नहीं!
तो अपने अपने जरिये से लोग समझ रहे हैं और समझा भी रहे हैं देश के लोग जो जागरूक भी है समस्या को एक दुसरे पर थोप रहे हैं ! कोई धार्मिक तो कोई जातीय नजर से समस्या को देख रहा है तो कोई किसी और अच्छे ठेकेदार को तलाश रहा है ! पर बहुत कम इतने से काम नहीं चलेगा पूरे देश को एक ही झटके में न केवल समझाना पड़ेगा बल्कि उन्हें करके दिखाना होगा की अंतर कैसे आ पायेगा! और अंतर आने तक पहरा देना होगा की कोई उन्हें गुमराह न कर पाए!

हमें सभी गाँवों में कम से कम पांच से दस साथी चाहियें जो देश के लिए बिना किसी लालच के अपना बहुमूल्य समय दे पाएं !