Tuesday, February 14, 2012

इस दुनिया में अनेक धर्म हैं और भारत में भी हैं पर कई लोगों को अपना धर्म अच्छा और बाकी सबका बुरा लगता है!
क्यों ?
ये तो मनोविज्ञान का प्रश्न है हर कोई अपने जैसे लोग बढ़ाना चाहता है शायद, पर नहीं अमीर तो नहीं चाहते की और लोग उसकी श्रेणी में आएं, कोई लाभ वाला बिज़नस करने वाला ये नहीं चाहता की कोई उसकी तरह दूकान खोले या फेक्टरी लगाए अगर किसी को सोने की खान का पता चल जाए तो वो किसी को नहीं बताता की खान कहाँ है !

पर अगर किसी को कोई गलत या अनैतिक कार्य करना हो तो वो अवश्य चाहता है की ज्यादा से ज्यादा लोग उसके जैसे हों ! शराबी चाहता हा की सब पियें ! जुआरी चाहता है की सब जुआ खेलें ! या कोई डर के मारे कोई कार्य करता है तो वो चाहता है की ज्यादा लोग उसके साथ आये जैसे अगर किसी गाँव में चोर आ जाएँ और किसी घर में छुप जाए तो कोई अकेला नहीं जाता वहां वो चाहता है की सारा गाँव चले

तो ये धर्म के ठेकेदार हमेशा क्यों चाहते है की ज्यादा लोग इनके धरम को अपनाए ! क्यों जरा गौर करें खुद से ही सवाल करें और खुद ही जवाब दें !
धर्म का क्या स्रोत है ,डर या अनैतिकता ? ज्यादातर धर्म इस धारना पर टिके हैं की इस धर्म के लोगों को स्वर्ग में स्थान मिलेगा किसे मिलेगा उसी व्यक्ति को जो उस धर्म में रहेगा उसके अनुसार चलेगा और ज्यादा लोगों को उससे जोड़ेगा किसी दुसरे को नहीं किसी रिश्तेदार को नहीं सिर्फ उसी को !
तो क्या धर्म एक निहायती व्यक्तिगत विषय नहीं है ? अगर उस धर्म में यह निर्देश न हो की उसका प्रचार करने से बोनस पॉइंट मिलेंगे ?

आज से करीब २००० साल पहले दुनिया में सभ्यता बहुत छिन्न भिन्न थी छोटे छोटे काबिले थे उनके सरदार थे जो ज्यादातर शारीरिक शक्ति के आधार पर चुने जाते थे जैसे आज भी सभी झुण्ड में रहने वाले जानकारों में होता है।

दिमाग का विकास हुआ तो कुछ लोगों ने साम दाम दंड भेद की खोज कर ली शारीरिक शक्ति के इलावा लोगों को समझाकर कोई लालच देकर डराकार या गुमराह कर अपने साथ रखने लगे और जिसके साथ ज्यादा लोग वो राजा
एक बार राजा बन जाने से समस्या समाप्त नहीं होती थी राजा के जरा सा कमजोर पड़ते ही उसे मार दिया जाता।

तो ईश्वर की इजाद भी किसी ने कर ही दी राजा उसका प्रतिनिधि है। भगवान एक सर्वशक्तिमान जो अनुचित कार्यों की सजा देता है और अच्छे कार्य का इनाम
लोगों ने देखा और कुछ बुद्धिजीवी व्यक्तियों ने देखा की फलां ने अनुचित कार्य किया और सजा नहीं मिली वो तो मजे में है! तो अगले जनम और पिछले जनम की भी खोज हुई ! बोला सजा अगले जन्म में मिलेगी अगर किसी को दुःख हुआ और उसने पूछा की मैंने तो कोई पाप नहीं किया तो उसे कहा गया पिछले जन्म की सजा है !
२००० साल ऐसे ही बीत गए इंसान ने ब्रह्माण्ड को छान मारा इश्वर की क्रोप कही जाने वाली बीमारियों पर विजय हुई !

इस दौरान न जाने कितने धर्म बने और बिगड़े कुछ कम फैले कुछ ज्यादा पर सभी धर्मों की मान्यताये देखकर उन हालात का अनुमान लगता है जिनमे वो पनपे हैं !
21st शताब्दी का धरम लोकतंत्र है ! जिसमे सभी समान हैं और समान अधिकार रखते हैं ! कोई किसी पर राज नहीं करता और न ही शोषण कर सकता है !

परन्तु कुछ शरारती तत्व ऐसे भी हैं !
जो इस लोकतंत्र के खिलाडी हैं और नए नए तरीके से राजा बने हुए हैं ! पर ज्यादा दिन तक नहीं ।
जो अभी भी वोही पुराना स्वर्ग का लालच दिखाकर और नरक से डराकर राज करने की इच्छा रखते हैं ! पर आज वैज्ञानिक युग के लोग स्वर्ग पाने में नहीं स्वर्ग बनाने में यकीन करेंगे और और बना लेंगे।
Sahab Singh at 8:16 AM
Tuesday, February 14, 2012

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