लोकतंत्र ऐसी व्यवस्था है की जिसमे देश के सभी नागरिक देश को चलाते हैं और तो देश का रजा कौन हुआ देश के सब नागरिक अधिकाँश नागरिक जो चाहेंगे वो होगा तो एक अछ्छे शाशन के लिए जरूरी है की सारी नहीं तो अधिकाँश जनता पढ़ी लिखी सविधान को समझाने वाली और और उस पर अमल करने वाली हो ! जैसे पुरातन काल में राजकुमारों को चहुमुखी शिक्षा दी जाती थी वो हर एक नागरिक को मिलनी चाहिए हर बच्चे को मिलनी चाहिए इसके लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान और ढांचा है ! पर कुछ रिश्वतखोर और आत्मकेंद्रित बीमार मानसिकता के शिकार लोगों ने उसे बेहद बुरे हालात में पंहुचा दिया है ! देश के कानून में मोजूद व्यवस्था इसे ठीक नहीं कर प् रही और हमारी मौन सविक्रिती भी इस के लिए जिम्मेदार है ! तो समाधान क्या है ?
देश के ६३६००० गावों में खुले स्कूलों में सुधार लाने के लिए हमें हर गाँव में हर स्कूल पर नजर रखनी होगी , ऐसी नजर अलग अलग लोग नहीं रख सकते और मोजूदा व्यवस्था से नहीं लड़ सकते इसके लिए हमें एक सयुक्त प्रयास की जरूरत है और इस सयुंक्त प्रयास का नाम हमने रखा है भारतीय सामाजिक सेना
तो आपको यदि किसी और से उम्मीद है या आपको देश के हालात से कुछ लेना देना नहीं है तो मोजुदा वयवस्था को कोसते रहेन पर अगर आप समझाते हैं की जजों करना है हमें करना है तो आगे बढ़ो और ज्वाइन करो इंडियन सोसिअल फाॅर्स ISF वन्दे मातरम
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