Friday, February 10, 2012

एक बार कुछ मित्र एक जहाज से सफ़र कर रहे थे की अचानक जहाज पर रह रहे चूहों ने जहाज की तली में दो छेद कर दिए । चारों लोग घबरा गए जहाज में पानी भरने लगा उनमे से एक बोला हमारा जहाज डूब जायेगा इस छेड़ को बंद करना होगा। तो दूसरा बोला हाँ बंद करना पड़ेगा। तीसरा बोला तुम्हे परेशान होना है होते रहो जब तक जहाज में पानी भरेगा हम किनारे जा पहुचेंगे । चौथा बोला और अगर न भी पहुंचे मेरे पास तो लाइफ जेच्केट है । मुझे परेशान होने की जरूरत नहीं है , पांचवां बोला में जहाज के भरोसे नहीं इश्वर के भरोसे चल रहा हूँ । इश्वर हमारी मदद कारागा और जहाज को पार लगाएगा । छटा बोला मरने का वकत आ गया है खा लो पि लो ऐश करलो और शराब की बोतल खोल कर पीने लगा, तीसरा और चौथा भी उसे कंपनी करने लगे पहले और दुसरे ने उन्हें सम्झ्हने की कोशिश की पर वो न माने पांचवां इश्वर की तस्वीर के आगे प्राथना करने बैठ गया आखिर वो दोनों छेदों बंद करने का पर्यास करने लगे पर उन्हें ऐसा कोई सामान ना मिला । तभी पहले को सूझा और उसने कहा की दोनों छेदों पर हाथ रख कर बैठ जाते हैं ! दूसरा पहले तो नहीं माना पर जब पानी बंद न हुआ तो वह भी छेड़ पर हाथ रख कर बैठ गया । उन्होंने पानी का आना बंद कर दिया था पर जहाज में बहुत पानी भर गया था । उन्होंने सभी से कहा की जहाज से पानी बहार निकल दो भाई पर सबने उनका मजाक उड़ाया । उन्हें बैठे बैठे बहुत ठण्ड लग रही थी ऊपर से वो दोनों पानी के अन्दर बैठे थे ।
उन्हें भूख लगी तो उन्होंने अपने बाकी साथियों से कहा की खाना तो हमें खिला दो पर तीसरा दूरबीन से किनारा ढूँढने लगा, चौथा अपनी लाइफ जाकेट को सवारने लगा।

तो पहले ने दुसरे से कहा की भाई तुम ही उठो और खाना बना लो मैं दोनों छेदों पर हाथ रखता हूँ । इस पर दुसरे को बहुत गुस्सा आया और बोला की तुम लोग काफ़िर हो और में तुम्हारा काम नहीं करूंगा हम दोनों अपना अपना छेद ही बंद रखेंगे तुम्हारा और हमारा कोई मेल नहीं है । और मुझे भूख नहीं है । यह सुनकर पहला निराश हो गया उसने उम्मीद से बाकी साथियों की और देखा , तीसरा और छठा शराब के नशे में मदहोश थे और पांचवें ने लाइफ जाकेट पहनकर समंदर में छलांग लगा दी थी । और भूख के चलते पहला बेहोश हो गया और गिर गया । पानी अब पहले वाले छेद में से अन्दर आने लगा उसने उसे रोकने के लिए उस पर अपना दूसरा हाथ अनमने ढंग से रख दिया और बैठ गया । रात हुई तो उसे भी भूख सताने लगी पर अब उसकी मदद के लिए कोई नहीं था। और आखिर वो भी चल बसा । पानी छेदों में से अन्दर आता रहा और आखिर जहाज डूब गया ............... क्या ये अंजाम ठीक है क्या ये अंजाम आपको मंजूर है? अगर है तो लगे रहिये अपने अपने रास्ते।

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