चुनाव हुआ CM बदला क्या फरक पड़ेगा जो अफसर पैसा ला ला कर मायावती जी को देते थे अब मुलायम जी को दे देंगे
देश में लोकतंत्र के नाम पर एक ठेकेदारी प्रथा चल रही है ! जो ज्यादा बोली लगता है जैसे ज्यादा आरक्षण ज्यादा माफ़ी ज्यादा वाडे ज्यादा दारु वो ठेका ले लेता है ! फिर पांच साल तक वही से कमाता है ! और उन्ही को बांटता है पैर धुलवाता है ! और पता नहीं क्या क्या !
लोकतंत्र की कामयाबी के लिए जरूरी है की सभी लोग व्यवस्था को समझने वाले हो देश का भला बुरा और जरूरत को अच्छी तरह समझते हों !
एक सो इक्कीस करोड़ लोगों को कौन समझाएगा ??
सरकार यानी ठेके दार पर क्यों !
उसे पता है जिस दिन ये लोग समझ गए वो जेल में जाएगा ! वो तो नहीं कभी नहीं!
तो अपने अपने जरिये से लोग समझ रहे हैं और समझा भी रहे हैं देश के लोग जो जागरूक भी है समस्या को एक दुसरे पर थोप रहे हैं ! कोई धार्मिक तो कोई जातीय नजर से समस्या को देख रहा है तो कोई किसी और अच्छे ठेकेदार को तलाश रहा है ! पर बहुत कम इतने से काम नहीं चलेगा पूरे देश को एक ही झटके में न केवल समझाना पड़ेगा बल्कि उन्हें करके दिखाना होगा की अंतर कैसे आ पायेगा! और अंतर आने तक पहरा देना होगा की कोई उन्हें गुमराह न कर पाए!
हमें सभी गाँवों में कम से कम पांच से दस साथी चाहियें जो देश के लिए बिना किसी लालच के अपना बहुमूल्य समय दे पाएं !
The Indian social force has been created for the sake of the nation by uniting the social forces and morals of those nations which have played a decisive role in the old ages of nations. Here they have groups for all kinds of men, women, religions, but they have no group for the nation, which is the real need for the nation. Sahab4u@gmail.com +919215505029 Facebook http://www.facebook.com/groups/force4u/
Wednesday, March 7, 2012
Tuesday, February 14, 2012
इस दुनिया में अनेक धर्म हैं और भारत में भी हैं पर कई लोगों को अपना धर्म अच्छा और बाकी सबका बुरा लगता है!
क्यों ?
ये तो मनोविज्ञान का प्रश्न है हर कोई अपने जैसे लोग बढ़ाना चाहता है शायद, पर नहीं अमीर तो नहीं चाहते की और लोग उसकी श्रेणी में आएं, कोई लाभ वाला बिज़नस करने वाला ये नहीं चाहता की कोई उसकी तरह दूकान खोले या फेक्टरी लगाए अगर किसी को सोने की खान का पता चल जाए तो वो किसी को नहीं बताता की खान कहाँ है !
पर अगर किसी को कोई गलत या अनैतिक कार्य करना हो तो वो अवश्य चाहता है की ज्यादा से ज्यादा लोग उसके जैसे हों ! शराबी चाहता हा की सब पियें ! जुआरी चाहता है की सब जुआ खेलें ! या कोई डर के मारे कोई कार्य करता है तो वो चाहता है की ज्यादा लोग उसके साथ आये जैसे अगर किसी गाँव में चोर आ जाएँ और किसी घर में छुप जाए तो कोई अकेला नहीं जाता वहां वो चाहता है की सारा गाँव चले
तो ये धर्म के ठेकेदार हमेशा क्यों चाहते है की ज्यादा लोग इनके धरम को अपनाए ! क्यों जरा गौर करें खुद से ही सवाल करें और खुद ही जवाब दें !
धर्म का क्या स्रोत है ,डर या अनैतिकता ? ज्यादातर धर्म इस धारना पर टिके हैं की इस धर्म के लोगों को स्वर्ग में स्थान मिलेगा किसे मिलेगा उसी व्यक्ति को जो उस धर्म में रहेगा उसके अनुसार चलेगा और ज्यादा लोगों को उससे जोड़ेगा किसी दुसरे को नहीं किसी रिश्तेदार को नहीं सिर्फ उसी को !
तो क्या धर्म एक निहायती व्यक्तिगत विषय नहीं है ? अगर उस धर्म में यह निर्देश न हो की उसका प्रचार करने से बोनस पॉइंट मिलेंगे ?
आज से करीब २००० साल पहले दुनिया में सभ्यता बहुत छिन्न भिन्न थी छोटे छोटे काबिले थे उनके सरदार थे जो ज्यादातर शारीरिक शक्ति के आधार पर चुने जाते थे जैसे आज भी सभी झुण्ड में रहने वाले जानकारों में होता है।
दिमाग का विकास हुआ तो कुछ लोगों ने साम दाम दंड भेद की खोज कर ली शारीरिक शक्ति के इलावा लोगों को समझाकर कोई लालच देकर डराकार या गुमराह कर अपने साथ रखने लगे और जिसके साथ ज्यादा लोग वो राजा
एक बार राजा बन जाने से समस्या समाप्त नहीं होती थी राजा के जरा सा कमजोर पड़ते ही उसे मार दिया जाता।
तो ईश्वर की इजाद भी किसी ने कर ही दी राजा उसका प्रतिनिधि है। भगवान एक सर्वशक्तिमान जो अनुचित कार्यों की सजा देता है और अच्छे कार्य का इनाम
लोगों ने देखा और कुछ बुद्धिजीवी व्यक्तियों ने देखा की फलां ने अनुचित कार्य किया और सजा नहीं मिली वो तो मजे में है! तो अगले जनम और पिछले जनम की भी खोज हुई ! बोला सजा अगले जन्म में मिलेगी अगर किसी को दुःख हुआ और उसने पूछा की मैंने तो कोई पाप नहीं किया तो उसे कहा गया पिछले जन्म की सजा है !
२००० साल ऐसे ही बीत गए इंसान ने ब्रह्माण्ड को छान मारा इश्वर की क्रोप कही जाने वाली बीमारियों पर विजय हुई !
इस दौरान न जाने कितने धर्म बने और बिगड़े कुछ कम फैले कुछ ज्यादा पर सभी धर्मों की मान्यताये देखकर उन हालात का अनुमान लगता है जिनमे वो पनपे हैं !
21st शताब्दी का धरम लोकतंत्र है ! जिसमे सभी समान हैं और समान अधिकार रखते हैं ! कोई किसी पर राज नहीं करता और न ही शोषण कर सकता है !
परन्तु कुछ शरारती तत्व ऐसे भी हैं !
जो इस लोकतंत्र के खिलाडी हैं और नए नए तरीके से राजा बने हुए हैं ! पर ज्यादा दिन तक नहीं ।
जो अभी भी वोही पुराना स्वर्ग का लालच दिखाकर और नरक से डराकर राज करने की इच्छा रखते हैं ! पर आज वैज्ञानिक युग के लोग स्वर्ग पाने में नहीं स्वर्ग बनाने में यकीन करेंगे और और बना लेंगे।
Sahab Singh at 8:16 AM
Tuesday, February 14, 2012
देशभक्तों सेse humara agrah hai ki ek baar hindu muslim sikh isai ke chole se bahar nikalkar ............ sirf desh ko aage rakhkar sochen aur bataayen ki hinduon mein muslims ke prati aur muslims mein hindus ke prati jo nafrat hai vo humen kahan le kar jaa rahi hai .... कहाँ backround mein jaate hain..... batwaare ka dosh poori tarah se gandhi g par madha jaata hai par aaj ke haalat dekh kar humen lagta hai ki gandhi g ka koi dosh nahin tha itni kattarta se sirf batwara hi ho sakta hai aur kuchh nahin batwaare se kya fayda hua
1. bhi nahin (fayda hua par US aur UK ko)
aur nuksaan
1. ek shaktishaali desh bharat jisne vishvyudh mein vijay hasil kar duniya ki dhuri badal di do hisso mein bant gaya
2. ek doosre ka jaani dushman ban gaye jinke liye anaaj ugaane se jyadan jaroori hathiyaar kharidna tha
3. is apsi dushmani ke chalte aaj 1 $ lagbhag 50 rs ke barabar hai unhone taraaki ki aur humne barbaadi
4. lakho log maare gaye jisme utne hi muslim bhi the aur hindu sikh bhi
5. aaj bhi agar ek insaan bhi agar chaahe humaare desh mein dange karwa sakta hai humen maarne ke liye RDX ki jaroorat nahin hai ek koyla hi kaafi hai dange bharkaane ke liye
6. akela bharat bhi kaaafi hai poori duniya se liha le sakta hai par hum aaj bhi deshbhakti ke mayne nahin samjhe hain humen dharam desh se jyada pyaara hai hai to theek hai dharam rahega par desh nahin bachega nahin bachega bachenge to chhote chhote tukre jo kuchh hindu kuchh muslim aur kuchh sikh honge par bharat nahin honge aur jitne tukre utne dange utna khoon sabka hoga apna apna desh
7 par ek ko doosre se gehun leni hogi to via UK ayegi ya china ya nepal aur tarki ke naam par hathiyaar kharide jayenge vahin se UK se Itlay se ya franse se
Sabhi sathiyon se hum Rastrabhakti ka ahvaaan karte hain, kisi maan ke do bete jab apas mein ladte hain to uska kya haal hota hai ye vo maan hi jaanti hai us maan ke dard ko samjho rok lo ye nafrat ki andhi rok lo....................
http://www.facebook.com/groups/force4u/
Friday, February 10, 2012
एक बार कुछ मित्र एक जहाज से सफ़र कर रहे थे की अचानक जहाज पर रह रहे चूहों ने जहाज की तली में दो छेद कर दिए । चारों लोग घबरा गए जहाज में पानी भरने लगा उनमे से एक बोला हमारा जहाज डूब जायेगा इस छेड़ को बंद करना होगा। तो दूसरा बोला हाँ बंद करना पड़ेगा। तीसरा बोला तुम्हे परेशान होना है होते रहो जब तक जहाज में पानी भरेगा हम किनारे जा पहुचेंगे । चौथा बोला और अगर न भी पहुंचे मेरे पास तो लाइफ जेच्केट है । मुझे परेशान होने की जरूरत नहीं है , पांचवां बोला में जहाज के भरोसे नहीं इश्वर के भरोसे चल रहा हूँ । इश्वर हमारी मदद कारागा और जहाज को पार लगाएगा । छटा बोला मरने का वकत आ गया है खा लो पि लो ऐश करलो और शराब की बोतल खोल कर पीने लगा, तीसरा और चौथा भी उसे कंपनी करने लगे पहले और दुसरे ने उन्हें सम्झ्हने की कोशिश की पर वो न माने पांचवां इश्वर की तस्वीर के आगे प्राथना करने बैठ गया आखिर वो दोनों छेदों बंद करने का पर्यास करने लगे पर उन्हें ऐसा कोई सामान ना मिला । तभी पहले को सूझा और उसने कहा की दोनों छेदों पर हाथ रख कर बैठ जाते हैं ! दूसरा पहले तो नहीं माना पर जब पानी बंद न हुआ तो वह भी छेड़ पर हाथ रख कर बैठ गया । उन्होंने पानी का आना बंद कर दिया था पर जहाज में बहुत पानी भर गया था । उन्होंने सभी से कहा की जहाज से पानी बहार निकल दो भाई पर सबने उनका मजाक उड़ाया । उन्हें बैठे बैठे बहुत ठण्ड लग रही थी ऊपर से वो दोनों पानी के अन्दर बैठे थे ।
उन्हें भूख लगी तो उन्होंने अपने बाकी साथियों से कहा की खाना तो हमें खिला दो पर तीसरा दूरबीन से किनारा ढूँढने लगा, चौथा अपनी लाइफ जाकेट को सवारने लगा।
तो पहले ने दुसरे से कहा की भाई तुम ही उठो और खाना बना लो मैं दोनों छेदों पर हाथ रखता हूँ । इस पर दुसरे को बहुत गुस्सा आया और बोला की तुम लोग काफ़िर हो और में तुम्हारा काम नहीं करूंगा हम दोनों अपना अपना छेद ही बंद रखेंगे तुम्हारा और हमारा कोई मेल नहीं है । और मुझे भूख नहीं है । यह सुनकर पहला निराश हो गया उसने उम्मीद से बाकी साथियों की और देखा , तीसरा और छठा शराब के नशे में मदहोश थे और पांचवें ने लाइफ जाकेट पहनकर समंदर में छलांग लगा दी थी । और भूख के चलते पहला बेहोश हो गया और गिर गया । पानी अब पहले वाले छेद में से अन्दर आने लगा उसने उसे रोकने के लिए उस पर अपना दूसरा हाथ अनमने ढंग से रख दिया और बैठ गया । रात हुई तो उसे भी भूख सताने लगी पर अब उसकी मदद के लिए कोई नहीं था। और आखिर वो भी चल बसा । पानी छेदों में से अन्दर आता रहा और आखिर जहाज डूब गया ............... क्या ये अंजाम ठीक है क्या ये अंजाम आपको मंजूर है? अगर है तो लगे रहिये अपने अपने रास्ते।
उन्हें भूख लगी तो उन्होंने अपने बाकी साथियों से कहा की खाना तो हमें खिला दो पर तीसरा दूरबीन से किनारा ढूँढने लगा, चौथा अपनी लाइफ जाकेट को सवारने लगा।
तो पहले ने दुसरे से कहा की भाई तुम ही उठो और खाना बना लो मैं दोनों छेदों पर हाथ रखता हूँ । इस पर दुसरे को बहुत गुस्सा आया और बोला की तुम लोग काफ़िर हो और में तुम्हारा काम नहीं करूंगा हम दोनों अपना अपना छेद ही बंद रखेंगे तुम्हारा और हमारा कोई मेल नहीं है । और मुझे भूख नहीं है । यह सुनकर पहला निराश हो गया उसने उम्मीद से बाकी साथियों की और देखा , तीसरा और छठा शराब के नशे में मदहोश थे और पांचवें ने लाइफ जाकेट पहनकर समंदर में छलांग लगा दी थी । और भूख के चलते पहला बेहोश हो गया और गिर गया । पानी अब पहले वाले छेद में से अन्दर आने लगा उसने उसे रोकने के लिए उस पर अपना दूसरा हाथ अनमने ढंग से रख दिया और बैठ गया । रात हुई तो उसे भी भूख सताने लगी पर अब उसकी मदद के लिए कोई नहीं था। और आखिर वो भी चल बसा । पानी छेदों में से अन्दर आता रहा और आखिर जहाज डूब गया ............... क्या ये अंजाम ठीक है क्या ये अंजाम आपको मंजूर है? अगर है तो लगे रहिये अपने अपने रास्ते।
पिछले ६२ साल में क्या हुआ क्या नहीं बहुत चर्चा हो चुकी अब हमें आज यहाँ से शुरू करना है। देश आजाद है नागरिक आजाद हैं अपना देश केवल सँभालने की जरूरत है.
हमारा देश भारत या कोई भी सवतंत्र राष्ट्र एक परिवार की तरह होता है! चाहे उसमे कुछ लाख और चाहे कई करोड़ लोग रहते हों ! एक देश या परिवार के साथ कुछ उतरदायित्व जुड़े होते हैं जो उसके सदस्यों या उसके मुखिया को निभाने पड़ते हैं! जो निम्न हैं!
अ - देश को बाहरी आक्रमणकारियों से बचाना व् इसके लिए तैयार रहना !
ब - देश के भीतर नागरिकों का चोरों लुटेरों और देश द्रोहियों से बचाव करना और व्यवस्था बनाए रखना!
स - देश के सभी नागरिकों को यथासंभव सभी सुख सुविधाएं उपलब्ध करवाना!
ल - देश के सभी नागरिकों को उनकी योग्यता के hisab से काम उपलब्ध करवाना!
ह - दुनिया के अन्य देशो से बेहतर तालमेल बनाना और प्रतिश्पर्धा में बने रहना!
क्या आप सहमत हैं ! यदि हाँ तो कौन सा कार्य किस क्रम पर आता है बताएं जैसे
१ अ २ ब ३ स ४ ल ५ ह
और अगर नहीं तो क्यों कृपया लिखें !
हमारा देश भारत या कोई भी सवतंत्र राष्ट्र एक परिवार की तरह होता है! चाहे उसमे कुछ लाख और चाहे कई करोड़ लोग रहते हों ! एक देश या परिवार के साथ कुछ उतरदायित्व जुड़े होते हैं जो उसके सदस्यों या उसके मुखिया को निभाने पड़ते हैं! जो निम्न हैं!
अ - देश को बाहरी आक्रमणकारियों से बचाना व् इसके लिए तैयार रहना !
ब - देश के भीतर नागरिकों का चोरों लुटेरों और देश द्रोहियों से बचाव करना और व्यवस्था बनाए रखना!
स - देश के सभी नागरिकों को यथासंभव सभी सुख सुविधाएं उपलब्ध करवाना!
ल - देश के सभी नागरिकों को उनकी योग्यता के hisab से काम उपलब्ध करवाना!
ह - दुनिया के अन्य देशो से बेहतर तालमेल बनाना और प्रतिश्पर्धा में बने रहना!
क्या आप सहमत हैं ! यदि हाँ तो कौन सा कार्य किस क्रम पर आता है बताएं जैसे
१ अ २ ब ३ स ४ ल ५ ह
और अगर नहीं तो क्यों कृपया लिखें !
Friday, February 3, 2012
लोकतंत्र ऐसी व्यवस्था है की जिसमे देश के सभी नागरिक देश को चलाते हैं और तो देश का रजा कौन हुआ देश के सब नागरिक अधिकाँश नागरिक जो चाहेंगे वो होगा तो एक अछ्छे शाशन के लिए जरूरी है की सारी नहीं तो अधिकाँश जनता पढ़ी लिखी सविधान को समझाने वाली और और उस पर अमल करने वाली हो ! जैसे पुरातन काल में राजकुमारों को चहुमुखी शिक्षा दी जाती थी वो हर एक नागरिक को मिलनी चाहिए हर बच्चे को मिलनी चाहिए इसके लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान और ढांचा है ! पर कुछ रिश्वतखोर और आत्मकेंद्रित बीमार मानसिकता के शिकार लोगों ने उसे बेहद बुरे हालात में पंहुचा दिया है ! देश के कानून में मोजूद व्यवस्था इसे ठीक नहीं कर प् रही और हमारी मौन सविक्रिती भी इस के लिए जिम्मेदार है ! तो समाधान क्या है ?
देश के ६३६००० गावों में खुले स्कूलों में सुधार लाने के लिए हमें हर गाँव में हर स्कूल पर नजर रखनी होगी , ऐसी नजर अलग अलग लोग नहीं रख सकते और मोजूदा व्यवस्था से नहीं लड़ सकते इसके लिए हमें एक सयुक्त प्रयास की जरूरत है और इस सयुंक्त प्रयास का नाम हमने रखा है भारतीय सामाजिक सेना
तो आपको यदि किसी और से उम्मीद है या आपको देश के हालात से कुछ लेना देना नहीं है तो मोजुदा वयवस्था को कोसते रहेन पर अगर आप समझाते हैं की जजों करना है हमें करना है तो आगे बढ़ो और ज्वाइन करो इंडियन सोसिअल फाॅर्स ISF वन्दे मातरम
देश के ६३६००० गावों में खुले स्कूलों में सुधार लाने के लिए हमें हर गाँव में हर स्कूल पर नजर रखनी होगी , ऐसी नजर अलग अलग लोग नहीं रख सकते और मोजूदा व्यवस्था से नहीं लड़ सकते इसके लिए हमें एक सयुक्त प्रयास की जरूरत है और इस सयुंक्त प्रयास का नाम हमने रखा है भारतीय सामाजिक सेना
तो आपको यदि किसी और से उम्मीद है या आपको देश के हालात से कुछ लेना देना नहीं है तो मोजुदा वयवस्था को कोसते रहेन पर अगर आप समझाते हैं की जजों करना है हमें करना है तो आगे बढ़ो और ज्वाइन करो इंडियन सोसिअल फाॅर्स ISF वन्दे मातरम
Monday, October 4, 2010
shaheedon ki chitaaon par lagenge har baras mele
watan pe mitne waalon ka yahin baaki nisan hoga
kahan hain vo mele ??
kahan hain vo nishan??
kahan hai vo ajadi jiske liye lakho shaheedon ne apni jaan dedi
shahheedon ke khoon se lal is ajadi ki kimat abhi humen chukaani hai
nahin chukaenge to bhugtana bhi humen parega socho ajadi ke baad humen kya mila hai aur kya abhi rahta hai?
1. Vote Kareeb adhe log vote dalne nahin jaate hai aur jo jaate hai vo jante nahin ki vote kaise daalen to log vote dalte hain use jo use naukry lagvade ya jo sharaab pilade ya kisi ameer admi ko jo gadi mein ghumaade
aur vote dalne ke baad raaj gore ka ho ya kaale ka koi kuchh nahin kar sakta
2. jameen kisan ko jameen mili par kab sarkaar adhigrahan kar le koi bharosa nahin kisaan bhi charon aur se sarkaar aur sarkarion se ghira hai
3. majdoor ko mila mminimum wages ka tohfa ajadi nahin majaak lagta hai, neta unke gharon mein raat gujaarkar number banate hain par minimum wages mein gujaara kaise ho ye nahin bataate hain
4......................................................................baaki kya mila hain mujhe samajh nahin aata sab tio vaise hi hai
siksha aaj bhi bhartiya sanskriti ka dum ghont rahi hai
police aaj bhi gareeb ka dalan aur amir se khairaat loot rahi hai
media aaj bhi westrn soch kojanta par thop rahi hai
divide and rule ne pahle desh kedo tukre karva diye aur ab bhi laga hua hai neta kursiyon par chpke hai janta doob rahi hai bari bari gadiyan (imported) tohfe mein di ja rahi hain
khair ye to sab sarfiron ki baate hain ye mauka nahin in baaton ka ye to khush hone ka mauka hai
desh mein commen wealth ho rahen hain neta bare khush hain desh mein CWG kamyaabi se ho jaenge to koi bhukha nahin rahega, adalto mein lakhon jhuthe sache mukdme jo chal rahe hain sab solve ho jaenge, sabhi bharstachari aur doshi netanon ko saja mil jaegi. desh mein faila avyvstha aur bhrastachari ka kapoot jo atankwaad hai vo bhi khatm ho jaayega
par commen wealth game mein game ke udghatan ko laker ek baat to shapast hai ki aaj bhi england ki maharani victoriya hamaare desh ki rashrtrapati se badi hai vo mharani hai aur hum gulaam (the??????????)
VANDE MATARAM
watan pe mitne waalon ka yahin baaki nisan hoga
kahan hain vo mele ??
kahan hain vo nishan??
kahan hai vo ajadi jiske liye lakho shaheedon ne apni jaan dedi
shahheedon ke khoon se lal is ajadi ki kimat abhi humen chukaani hai
nahin chukaenge to bhugtana bhi humen parega socho ajadi ke baad humen kya mila hai aur kya abhi rahta hai?
1. Vote Kareeb adhe log vote dalne nahin jaate hai aur jo jaate hai vo jante nahin ki vote kaise daalen to log vote dalte hain use jo use naukry lagvade ya jo sharaab pilade ya kisi ameer admi ko jo gadi mein ghumaade
aur vote dalne ke baad raaj gore ka ho ya kaale ka koi kuchh nahin kar sakta
2. jameen kisan ko jameen mili par kab sarkaar adhigrahan kar le koi bharosa nahin kisaan bhi charon aur se sarkaar aur sarkarion se ghira hai
3. majdoor ko mila mminimum wages ka tohfa ajadi nahin majaak lagta hai, neta unke gharon mein raat gujaarkar number banate hain par minimum wages mein gujaara kaise ho ye nahin bataate hain
4......................................................................baaki kya mila hain mujhe samajh nahin aata sab tio vaise hi hai
siksha aaj bhi bhartiya sanskriti ka dum ghont rahi hai
police aaj bhi gareeb ka dalan aur amir se khairaat loot rahi hai
media aaj bhi westrn soch kojanta par thop rahi hai
divide and rule ne pahle desh kedo tukre karva diye aur ab bhi laga hua hai neta kursiyon par chpke hai janta doob rahi hai bari bari gadiyan (imported) tohfe mein di ja rahi hain
khair ye to sab sarfiron ki baate hain ye mauka nahin in baaton ka ye to khush hone ka mauka hai
desh mein commen wealth ho rahen hain neta bare khush hain desh mein CWG kamyaabi se ho jaenge to koi bhukha nahin rahega, adalto mein lakhon jhuthe sache mukdme jo chal rahe hain sab solve ho jaenge, sabhi bharstachari aur doshi netanon ko saja mil jaegi. desh mein faila avyvstha aur bhrastachari ka kapoot jo atankwaad hai vo bhi khatm ho jaayega
par commen wealth game mein game ke udghatan ko laker ek baat to shapast hai ki aaj bhi england ki maharani victoriya hamaare desh ki rashrtrapati se badi hai vo mharani hai aur hum gulaam (the??????????)
VANDE MATARAM
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