Sunday, April 26, 2015

Rashtravadi?????????????

बड़े दिन हुए फेसबुक पर रिएक्टिव हुए जैसे ही पढना शुरू करते हैं हिन्दू हिन्दू मुस्लिम मुस्लिम सिख सिख फलाना फलाना धिम्काना धिम्काना ................................ समझ में नहीं आता क्या फोबिया है कोई योजना नहीं है कोई पॉजिटिव अहसास  नहीं ..........

ऐसा लगता है जैसे 1947 के दौर में पहुच गए हैं ! वो दंगे ..................................मान लिया कांग्रेस ने करवाए थे, बटवारा कांग्रेस ने करवया था, गोडसे ने उनकी हत्या कर दी !

पर अब ये फेसबुक पर जो नफरत कि खेती हो रही है ! वो भी गाँधी कर रहे हैं क्या .....

देश है.... कानून है.... आजादी है.... टेक्नोलॉजी है.... ,,हम एक अतिविकसित देश बना सकते हैं !

पर

 इसमें गलत लिखा है उसमे गलत लिखा है उसने तब गलत किया था इसने तब गलत किया है इसकी क्या जरूरत है ! जो गलत लिखा है वह इसलिए गलत नहीं हो सकता कि आपको गलत लग रहा है !

वो गलत होना चाहिए ......

१ कानून भारत के सविधान के अनुसार .
२ कुदरत के कानून के अनुसार या
३ इंसानियत के खिलाफ

तभी वो गलत है ! कोई अगर अपनी परिभाषा बनाकर खुद को राष्ट्रवादी कहे और राष्ट्रद्रोह करे तो ये ऐसे ही हो जायेगा जैसे कांग्रेस सेकुलेर सेकुलेर कर मुस्लिम तुस्टीकरण करती रही और आलम ये कि सेकुलेर शब्द का असली मतलब ही लोग भूल गए

साथियों राष्ट्रवादी हिन्दू मुस्लिम सिख या इसाई  नहीं होता, राष्ट्रवाद का जो हश्र आप लोग कर रहे है, जानबूझकर या अनजाने में इसका नतीजा बहुत भयानक हो सकता है

पहले विकृत हिंदुत्व कि मार से देश कई बार टूट गया

फिर विकृत इस्लाम ने इसके टुकड़े कर दिया

और इसपर ये विकृत राष्ट्र वाद

देश तो तार तार हो जायेगा

माना कि कुछ लोग देशद्रोही हैं माना कि कुछ लोग स्वार्थी हैं माना कि कुछ लोग गुमराह हैं  उन्हें साम दाम दंड भेत कैसे भी करेंगे सेट कर देंगे !

पर जो राष्ट्रवादी हैं उनका क्या,,,, जाने किस राष्ट्र के राष्ट्रवादी है !

इतिहास हम बदल नहीं सकते उससे सीख ले सकते हैं सीख ले कर इतिहास बना सकते हैं !

हम इन्तजार कर रहे हैं देश में रह रहे बचे खुचे सचे राष्ट्र वादियों का जिन्हें साथ ले कर हम शहीदों के सपनो का भारत बनायेंगे

पर जितना टटोलो उतना ही छंदम राष्ट्रवाद दिखाई पड़ता है! राजनीतिक स्वार्थ  नजर पड़ता हैं





मित्रो राष्ट्रवादी हो और देश के लिए काम करना चाहते हो साथ आयें







Saturday, March 23, 2013

जब maine  kranti  ke  raste  par kadam rakha to maine socha tha ki agar main apna balidaan dekar desh ke sab gali koochon mein "INQLAAB JINDABAAD " ka nara faila sakoon to main samjhuga ki maine apne jivan ka mulya pa liya hai , Aaj jab mein jal ki salakhon ke pichhe se apne karoron deshvasiyon ke gale se isi naare ki dahadti avaj sunta hoon ,

Isase jyada  is chhote se jivan ka kya mulya ho sakta hai


Bhagat Singh

Thursday, March 14, 2013

सरकार की मानसिकता समझ से परे है ! 
दिल्ली में  बलात्कार होता है ! आन्दोलन होता है ! सख्त कानून की मांग उठती है !

 सरकार सेक्स की उम्र अठारह से सोलह कर देती है ! क्यों ?

Friday, February 1, 2013

हमें एक ऐसा भारत चाहिए जहाँ 
  1. जाती और धर्म के नाम पर कोई योजना नहीं होगी !
  2. जहाँ मिनिमम वेजस  में सब  का गुजारा होता हो !
  3. जहाँ अमीर और गरीब की आमदन में जानलेवा अंतर न हो!
  4.  जहाँ कंपनी के नाम पर घोटालों का लिसेंस न मिलता हो!
  5. जहाँ .................
देश में  आज में देख रहा हूँ की राजनितिक पार्टियों के पिट्ठू कभी किसी का और कभी किसी का नाम PM पद के  उछाल रहे हैं ! पर    उनमे से कोई ये दावा,  वादा   करता नहीं दिखता  की क्या होगा, कैसे होगा !

हमें कैसा प्रधान मंत्री चाहिए ?
ऐसा जो की  ....
1. पहले साल में
अ)  जेल में बंद परे सारे गंभीर अपराधियों को फांसी दे दे . और जेल में आम अपराधियों के लिए और गंभीर अपराधियों के लिए अलग अलग वयवस्था करे !
ब)   अदालतों में लटके सभी मामलों के निपटान को सुनिश्चित करे और सुनिश्चित करे की  कोई मामला 1 साल से ज्यादा  न लटके
स)   पूरे देश में  सभी की सम्पति का  सारा ब्यौरा एकत्रित कर सबको राष्ट्रीय कार्ड दे दे !  कार्ड से ज्यादा किसी से  कोई सम्पति  मिले तो वो राष्ट्रीय मानी जाए!

ड)   देश में नागरिक से नागरिक में भेद करने वाले सभी एक्ट निरस्त कर दे !
इ)  एक  आमदन का  ख़ुशी क्षेत्र  तय किया  जाए और सभी देशवासियों को  उसमे ले  जाने की व्यवस्था  की जाए ! ये सुनिश्चित किया जाए की हफ्ते में 5  दिन रोज 8 घंटे कार्य करने वाला कोई भी नागरिक अपना  और अपने माता पिता बीवी व् दो बच्चो का गुजारा शान से चला सके !
फ)  सभी नागरिकों को शिक्षा , सुरक्षा  और स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त मिलें बदले में सभी नागरिक अपनी आमदनी  का कुछ प्रतिशत राष्ट्र को दान दें 
ग)  सभी  सरकारी नौकरियां आर्मी के रस्ते मिलें , ताकि देश को लूटने से पहले वो जान  सकें की कैसे इस देश की हिफाजत की जाती है !
2. दुसरे साल में
अ)   देश के सभी राज्यों  में  बिजली के  परमाणु या किसी  ईंधन से चलने वाले इतने सयंत्र प्लान करे की आने वाले 4 साल में सभी को 24 घंटे  मिल सके !
ब)   देश की सारी आबादी के लिए संचार और यातायात के सुगम और स्वदेशी साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो !
स)  एक सर्वमान्य विवाह कानून बनाया जाए जिससे स्त्री पुरुष की समान भूमिका सुनिश्चित हो और लैंगिक अपराध  नियंत्रित हों
ड)  देश में मोजूद सभी गैरजरूरी टेक्सों को ख़तम किया जाए क्योंकि टेक्स का  उदेश्य सिर्फ
      1. राष्ट्रीय  खर्च की पूर्ति
      2. अमीर गरीब के अंतर को घटाना  और
      3. असामाजिक आर्थिक गतिविधियों को हतोत्साहित  करना ही होना चाहिए
इ)  सभी नागरिक सेवा केन्द्रों पर कंप्यूटर को बिचोलिया  बनाकर अधिकारीयों पर लगाम लगाये
फ) सभी जिला या ब्लाक स्तर पर उपयुक्त केंद्र बनाये  जिसमे सभी अधिकारीयों, पुलिस/ सैनिक, व बेघर लोगों के लिए सुरक्षित निवास हों और सभी सरकारी दफ्तर हों !
ग) पूरे देश में एक समान शिक्षा का पाठ्यक्रम करे ! 
ह) सभी  नौकरियों के लिए 10+2 के बाद परीक्षा हो जिसमे सब  कंप्यूटर द्वारा किया जाए !

Pending...............

Monday, January 28, 2013

दिल्ली  में एक अपराध होता है और जनता  सडको पर इन्साफ के लिए उतर जाती है सरकार पहले इसका विरोध करती है लाठी चार्ज करती है और कुछ  दिन के आन्दोलन के पश्चात कुछ खाना  पूर्ति  करती है !

 अगर ये घटना देश के किसी गाँव में हुई होती या जनता सडको पर न  आती तो क्या होता, इन्साफ तो दूर की बात है ! उस युवती की लाश लेने के लिए भी शायद  पुलिस और हस्पताल के कर्मचारियों को रिश्वत देनी पड़ती !

जी हाँ ऐसे लाखों केस देश में होते हैं जिनके लिए कोई सड़कों पर नहीं आता !

इस सब का समाधान क्या  कठोर सजा ही  है ! या कठोर सजा इसका बदला भर है !
 किसी भी अपराध के तीन अंग होते हैं !
1. अपराधिक मानसिकता
2. अप्राधुप्युक्त माहौल
3. आसान शिकार 

अपराध रोकने के लिए इन तीनों में से किसी एक को हटा दें तो आपराध नहीं होगा 
परन्तु एक अच्छा समाज व  राष्ट्र  बनाने के लिए हमें इन तीनों कारणों को हटाना पड़ेगा 


कठोर सजा इस समस्या का हल नहीं अपितु बदले की कार्यवाही है !
कठोर दंड आवश्यक है पर काफी नहीं , आवश्यक है की सजा हो और  समय से हो .......................................

Tuesday, April 17, 2012

आज भारत के हालात चाहे कुछ भी हों! हमें मायूस नहीं होना है ! ये हालात बदलने हैं ! अगर हम अंग्रेजों के चंगुल से इस देश  को छुड़ा सकते हैं तो इसे दुनिया का सबसे अच्छा रहने लायक स्थान भी बना सकते हैं!
तो हमारी  क्या योजनाये हैं और क्या चुनोतियाँ हैं ! और उनके क्या समाधान हैं!
सबसे पहले क्या ?  चाहते हैं हम!

देश के सविधान के अक्षरक्ष अमल के इलावा हमारा उद्देश्य है की इक ऐसी व्यव्स्था हो की एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति का शोषण न कर सके !
हमारे सपनो के भारत में साथियों ......................... (आप सभी के विचार आमंत्रित हैं)