आज देश का हर व्यक्ति बहुत डरा हुआ और असुरक्षित है ! इसका कारण कोई और नही हम ख़ुद ही हैं ! किसी को अपने अच्छे और बुरे भविष्य का फ़िक्र अपने आप ही करना पड़ता है ! हमारे देश से तो उनको भी कोई उम्मीद नहीं है जिनका सारा जीवन देश की सेवा में गुजरा हो! जिसका सारा परिवार देश के लिए सरहद पर सहीद हो गया हो! तो आम आदमी देश से क्या उम्मीद कर सकता है ! क्या वो देश जिसके सर का ताज हिमालय हो जिसके पास दुनिया की हर खनिज संपदा हो! जो लीग पुरी दुनिया में जा कर अपनी काबलियत का लोहा मनवा चुके हों ! वहां आज भी लोगों को बीमारी का डकेती का भुखमरी का और बारिश का डर सताता है क्यों ? क्योंकि हम अपनी हस्ती को पहचान नहीं रहे हैं !
हम नहीं जानते की कितना कोयला हर रोज खदानों से निकल कर जाने कितने नेताओं, व्यापारिओं और बदमाशों की तिजोरिओं में चला जाता है कभी न निकलने के लिए इस पैसे का इस्तेमाल फ़िर देश के लिए या ख़ुद इन व्यापारिओं के लिए कभी नहीं होता होता है सिर्फ़ नुक्सान के ,चारित्रिक पतन के लिए, गरीबो के दलन के लिए और कानून तोड़ने के लिए बनवाने के लिए ......................
इसका भी कारण कोई और नहीं हम ख़ुद हैं ! देश को चलने की ताक़त किसी और में नहीं ख़ुद हममें है! अभी तक ये हमारा सोभाग्य है की हमारी इतनी लापरवाही के बाद भी लोकतंत्र बरकरार है इसमे हमारी बड़ाई नहीं है ! ये तो उन व्यापारिओं की आपसी प्रतिस्पर्धा है जो देश को ठेके पर चला रहे हैं और हम उन्हें चलने दे रहे हैकोई जात पात के अधर पर कोई शराब पीकर कोई अपने किसी योग्य या अयोग्य परिजन को नौकरी पर लगवाकर या कोई किसी काले धंधे को चला कर अपने वोट की कीमत वसूल कर रहा है ! हम नहीं जानते की अपने ही घर को लूटकर, अपने देश को लूटकर, अपने ही शहीद भाईओं की कुर्बानी को बेचकर, अपने ही बच्चों के भविष्य को खाकर हम अपने रस्ते में कांटे बो रहे हैं !
हम लोग अयोग्य नहीं है ! हम इतने निकम्में भी नहीं है ! इतने मुर्ख भी नहीं हैं ! हम अपनी आत्मकेंद्रित सोच और सक्रों बरसो की गुलामी से पैदा हुई परिस्थितियों में उलझे हुए हैं ! और चाहे तो देश में वो हालत पैदा हो सकते है जिनकी कल्पना हम स्वर्ग में करते हैं ! जरूरत है ...................................
किसी को फांसी पर चदने की जरूरत नहीं ! घर बार छोड़ने की जरूरत नहीं ! किसी दंगे की जरूरत नहीं ! किसी को मार भगाने की जरूरत नहीं जरूरत नहीं है किसी तीर की तलवार की या बन्दूक की !
जरूरत है तो केवल अपनी वोट को बिकाऊ न बनाने की देश को व्यापारिओं के हांथों न देकर ख़ुद चलने की .....................
5 comments:
आपका लेख पढ़ा, प्रसंशनीय है. आपकी चिंता स्वाभाविक है. चर्चा होनी चाहिए. लिखते रहिये.
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साथ ही आपको उल्टा तीर पर जारी बहस में आपके अमूल्य विचारों के लिए भी कहूँगा, व् आमंत्रित करता हूँ, "उल्टा तीर" मंच की ओर से जश्ने-आज़ादी-२००८ की पत्रिका में अपने विचारों के साथ शिरकत करने हेतु. शुक्रिया
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यहाँ पधारे;
उल्टा तीर।
बहुत अच्छा लिखा है। स्वागत है।
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.
वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.
हिन्दी ब्लॉग परिवार में आपका स्वागत है। हम आपसे नियमित ब्लॉग लेखन की अपेक्षा करते हैं।
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बढ़िया लिखा है। जो, सोच है उसके आगे बढ़ाएं शुभकामनाएं।
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