The Indian social force has been created for the sake of the nation by uniting the social forces and morals of those nations which have played a decisive role in the old ages of nations. Here they have groups for all kinds of men, women, religions, but they have no group for the nation, which is the real need for the nation. Sahab4u@gmail.com +919215505029 Facebook http://www.facebook.com/groups/force4u/
Sunday, August 22, 2010
आखिर कब तक ?
इसके इलावा देश में पैदा हुए लोग केवल इसी की सजा भुगत रहे हैं की वो भारत में पैदा हुए हैं ! की १० -१० घंटे काम करके भी उन्हें १०० रूपए मिलते हैं ! देश का कोई मंत्री या अफसर बता दे की कैसे गुजारा हो सकता है ! ये १०० तो केवल उन खुशकिस्मत लोगो को मिलते हैं जो किसी अछ्छी जगह काम ढूढ़ लेते हैं ! बाकी को मिलता है २० ३० या ५० !
मेरी अपील है राहुल गाँधी से सोनिया गाँधी से प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह से की इस बार बजट बनाए तो ऐसा की मिनिमुम वेजुस से एक परिवार का गुजारा हो ! या तो छोड़ दे कुर्सी क्योंकि कोंग्रेस का एकाधिकार देश पर भारी पद रहा है !
वन्दे मातरम
Tuesday, July 20, 2010
कार्ययोजना
Tuesday, October 6, 2009
आजाद भारत में देश के सम्पूर्ण रजा हम हैं व् अपने राज्य का राजकाज देखने के लिए हम अपने प्रतिनिधि चुनेंगे आपके मत के अनुसार ये प्रतिनिधि अपना एक नेता चुनेंगे! वह नेता फ़िर सब राजकाज आपके चुने हुए प्रतिनिधियों की सलाह पर किया जाएगा! आइये वोट डालने से पहले जाने लोकतंत्र और राजतंत्र में अन्तर
जनता---------------> प्रतिनिधि -----------------> सीएम
या
राजा ----------------> सामंत -------------------->प्रजा
आज जो लोकतंत्र हमारे सामने है उसमे सीएम पहले से निश्चित है ! वो अपना प्रतिनिधि हम पर थोपता हैं ! और हम एक बार वोट देने के बाद बेबस और लाचार हो जाते हैं !
पर आज ये राज आपके हाथ में है दम रखो और अपना राज संभालो अपना प्रतिनिधि कर्तव्य और अधिकार से चुनो
अपना विधायक चुनने से पहले चुनाव करें
Tuesday, December 16, 2008
मुंबई हादसे से लेकर सड़क हादसे तक सब के लिए जिम्मेदार है हमारी लच्चर व्यवस्था और लालची व्यापारी सरकार और इस सरकार के लिए जिम्मेदार हैं हम हमारा लालच और अंधी दौड़! कभी रुक कर सोचेंगे तो पता चलेगा की हम अपना भविष्य खा रहे हैं ! तरक्की के नाम पर अपना अधिकार व्यापारिओं के हाथों सोपकर ख़ुद को उनका गुलाम बना रहे हैं !
जब तक देश का हर नागरिक ख़ुद को देश की व्यवस्था के लिए उतरदायी नहीं मानेगा गुलामी का सिलसिला चलता रहेगा ! जिस दिन हम जागे सब ठीक हो सकता है पर कहीं देर न हो जाए ........................................
Thursday, July 24, 2008
आज देश का हर व्यक्ति बहुत डरा हुआ और असुरक्षित है ! इसका कारण कोई और नही हम ख़ुद ही हैं ! किसी को अपने अच्छे और बुरे भविष्य का फ़िक्र अपने आप ही करना पड़ता है ! हमारे देश से तो उनको भी कोई उम्मीद नहीं है जिनका सारा जीवन देश की सेवा में गुजरा हो! जिसका सारा परिवार देश के लिए सरहद पर सहीद हो गया हो! तो आम आदमी देश से क्या उम्मीद कर सकता है ! क्या वो देश जिसके सर का ताज हिमालय हो जिसके पास दुनिया की हर खनिज संपदा हो! जो लीग पुरी दुनिया में जा कर अपनी काबलियत का लोहा मनवा चुके हों ! वहां आज भी लोगों को बीमारी का डकेती का भुखमरी का और बारिश का डर सताता है क्यों ? क्योंकि हम अपनी हस्ती को पहचान नहीं रहे हैं !
हम नहीं जानते की कितना कोयला हर रोज खदानों से निकल कर जाने कितने नेताओं, व्यापारिओं और बदमाशों की तिजोरिओं में चला जाता है कभी न निकलने के लिए इस पैसे का इस्तेमाल फ़िर देश के लिए या ख़ुद इन व्यापारिओं के लिए कभी नहीं होता होता है सिर्फ़ नुक्सान के ,चारित्रिक पतन के लिए, गरीबो के दलन के लिए और कानून तोड़ने के लिए बनवाने के लिए ......................
इसका भी कारण कोई और नहीं हम ख़ुद हैं ! देश को चलने की ताक़त किसी और में नहीं ख़ुद हममें है! अभी तक ये हमारा सोभाग्य है की हमारी इतनी लापरवाही के बाद भी लोकतंत्र बरकरार है इसमे हमारी बड़ाई नहीं है ! ये तो उन व्यापारिओं की आपसी प्रतिस्पर्धा है जो देश को ठेके पर चला रहे हैं और हम उन्हें चलने दे रहे हैकोई जात पात के अधर पर कोई शराब पीकर कोई अपने किसी योग्य या अयोग्य परिजन को नौकरी पर लगवाकर या कोई किसी काले धंधे को चला कर अपने वोट की कीमत वसूल कर रहा है ! हम नहीं जानते की अपने ही घर को लूटकर, अपने देश को लूटकर, अपने ही शहीद भाईओं की कुर्बानी को बेचकर, अपने ही बच्चों के भविष्य को खाकर हम अपने रस्ते में कांटे बो रहे हैं !
हम लोग अयोग्य नहीं है ! हम इतने निकम्में भी नहीं है ! इतने मुर्ख भी नहीं हैं ! हम अपनी आत्मकेंद्रित सोच और सक्रों बरसो की गुलामी से पैदा हुई परिस्थितियों में उलझे हुए हैं ! और चाहे तो देश में वो हालत पैदा हो सकते है जिनकी कल्पना हम स्वर्ग में करते हैं ! जरूरत है ...................................
किसी को फांसी पर चदने की जरूरत नहीं ! घर बार छोड़ने की जरूरत नहीं ! किसी दंगे की जरूरत नहीं ! किसी को मार भगाने की जरूरत नहीं जरूरत नहीं है किसी तीर की तलवार की या बन्दूक की !
जरूरत है तो केवल अपनी वोट को बिकाऊ न बनाने की देश को व्यापारिओं के हांथों न देकर ख़ुद चलने की .....................
Friday, March 7, 2008
नहीं !!!!!!!
हम लोग कमजोर हैं ?
नहीं !!!!!!!
हम केवल bnate हुए हैं ! daraae हुए हैं !
इस halat से niklane के लिए एक या कुछ लोग अपने जीवन का बलिदान दे इससे अच्छा है की हम सब अपनी agyanta, लालच और ATMKENDRIT सोच को छोड़ थोड़ा थोड़ा समय देश के लिए दे दे !
TO देश में किसी SMASYA के लिए स्थान नहीं BACHEGA !
JAY HIND